विधानसभा में गूंजा गोचर भूमि का मुद्दा: अंशुमान सिंह भाटी ने बीकानेर में देश का सबसे बड़ा गौ-अभयारण्य बनाने की रखी मांग
बीकानेर. कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने विधानसभा में नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग की मांगों पर चर्चा के दौरान बीकानेर शहर की परिधि में स्थित गोचर भूमियों को बचाने और उन्हें हिंदुस्तान के सबसे बड़े गौ-अभयारण्य के रूप में विकसित करने की जोरदार मांग उठाई।
उन्होंने शरह नथानिया, सुजानदेसर, भीनासर और उदयरामसर सहित आसपास की हजारों हेक्टेयर गोचर भूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि इन भूमियों का अस्तित्व खतरे में है और यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश की गोवंश संपदा पर गंभीर संकट आ सकता है।
5418 हेक्टेयर भूमि को रिजर्व एरिया घोषित करने की मांग
भाटी ने सदन को बताया कि वर्ष 2025 में बीकानेर विकास प्राधिकरण के गठन के दौरान परिधि क्षेत्र में करीब 5418 हेक्टेयर गोचर भूमि चिन्हित की गई थी। इन भूमियों को निकाय के नाम दर्ज कर उनकी किस्म परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसका स्थानीय नागरिकों और संत समाज ने विरोध किया।
उन्होंने कहा कि 28 जनवरी 2026 को बीकानेरवासियों ने धरने की घोषणा की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री को इस विषय से अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री द्वारा गोचर भूमि को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया था। भाटी ने मांग की कि इन 5418 हेक्टेयर भूमि को तुरंत प्रभाव से रिजर्व एरिया घोषित कर देश का सबसे बड़ा गौ-अभयारण्य विकसित किया जाए।
राजस्व आदेशों पर उठाए सवाल
विधायक भाटी ने 8 दिसंबर 2010 और 17 दिसंबर 2019 के राजस्व विभाग के आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन आदेशों के तहत निकाय क्षेत्र में आने वाली राजकीय भूमियों, जिनमें गोचर भी शामिल है, को गैर मुमकिन आबादी में परिवर्तित करने का प्रावधान किया गया।
उन्होंने डीएलबी के 23 सितंबर 2021 के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें नगरपालिका अधिनियम 2009 में संशोधन कर धारा 48-ए जोड़ी गई। भाटी का आरोप है कि इन प्रावधानों के चलते निकाय क्षेत्रों में स्थित गोचर भूमियों को निकाय के डिस्पोजल पर रख दिया गया, जिससे उनके संरक्षण के अधिकार कमजोर हो गए।
सदन में उन्होंने उच्च न्यायालय के ‘गुलाब कोठारी बनाम सरकार’ फैसले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 1947 में जितनी गोचर भूमि थी, उससे कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
“गीता, गाय और गांव का संरक्षण जरूरी”
भाटी ने संत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए गीता, गाय और गांव का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गोचर ही समाप्त हो जाएगी तो गोवंश का संरक्षण कैसे संभव होगा?
उन्होंने सभी दलों से राजनीति से ऊपर उठकर गोचर भूमि संरक्षण पर ठोस निर्णय लेने की अपील की।
कोलायत को नगरपालिका बनाने की मांग
विधायक भाटी ने कोलायत कस्बे को नगरपालिका घोषित करने की भी मांग की। उन्होंने बताया कि कोलायत पंचायत समिति, तहसील और उपखंड मुख्यालय है तथा कोलायत, मढ और कोटड़ी ग्राम पंचायतों की संयुक्त आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 15,250 है। धार्मिक आस्था के केंद्र श्री कपिल मुनिश्वर की तपोस्थली श्री कोलायतजी का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे नगरपालिका का दर्जा देने की आवश्यकता बताई।
देशनोक नगरपालिका में पट्टा प्रकरण की जांच की मांग
भाटी ने देशनोक नगरपालिका के वर्ष 2021 के एक मामले को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन अध्यक्ष ने पद का दुरुपयोग करते हुए स्वयं और अपने रिश्तेदारों के नाम 12 पट्टे जारी किए।
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पद पर रहते हुए कोई भी सदस्य स्वयं या अपने रिश्तेदारों के नाम पट्टा जारी नहीं कर सकता। उन्होंने इन पट्टों को निरस्त कर भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से जांच करवाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

