मदर्स डे पर पूर्व पार्षद ने निभाया बेटे का फर्ज, बेसहारा मां को दिलाया इलाज और घर पहुंचाया

बीकानेर. बीकानेर में मदर्स डे के मौके पर इंसानियत और मानवीयता की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। जब अपने ही बेटों ने मां को अस्पताल में बेसहारा छोड़ दिया, तब एक पूर्व पार्षद ने बेटे का फर्ज निभाते हुए न केवल उसका इलाज करवाया बल्कि सम्मान के साथ घर भी पहुंचाया।
श्रीगंगानगर निवासी लाल मीरा कौर मजबी सिख को उसके दो बेटे और बहू एक मई को इलाज के लिए पीबीएम अस्पताल लेकर आए थे। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद वे उसे वहीं छोड़कर चले गए। महिला के पास आधार कार्ड नहीं होने के कारण इलाज भी शुरू नहीं हो पा रहा था। बेसहारा महिला अस्पताल में अपने हालात से जूझती रही। इसी दौरान उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद पूर्व पार्षद मनोज विश्नोई तुरंत पीबीएम अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले महिला के इलाज की व्यवस्था करवाई और अस्पताल प्रशासन से बात कर उपचार शुरू करवाया। इसके बाद उन्होंने महिला के दोनों बेटों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों ने मां को अपनाने से साफ इनकार कर दिया।
इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। वहीं लाल मीरा कौर ने अपनी इच्छा जताई कि वह वापस श्रीगंगानगर जाना चाहती है। इस पर मनोज विश्नोई ने न केवल उसके लिए दवाइयों और घर के राशन की व्यवस्था की, बल्कि उसे बस के जरिए सुरक्षित श्रीगंगानगर भी रवाना करवाया। जाते समय उन्होंने महिला से कहा कि भविष्य में किसी भी जरूरत के लिए वह उनसे संपर्क कर सकती है।
इस नेक कार्य में उनके साथी राजेश ने भी सहयोग किया। मेडिकल दवा कंपनी से जुड़े राजेश ने अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने वाली करीब आठ हजार रुपये की दवाइयां महिला को उपलब्ध करवाईं।
मदर्स डे के दिन की गई इस मदद ने लोगों का दिल जीत लिया। मनोज विश्नोई ने इस पूरी घटना को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि भौतिकवादी दौर में मानवता धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। जिन बच्चों के लिए मां पूरी जिंदगी संघर्ष करती है, वही बच्चे जब मां को अकेला छोड़ दें तो यह समाज के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने लिखा कि कभी अपने बच्चों के संकट में ढाल बनकर खड़ी रहने वाली मां आज खुद बेसहारा हो गई है। उनकी इस पोस्ट के बाद कई समाजसेवियों और आम लोगों ने भी लाल मीरा कौर की मदद के लिए आगे आने की इच्छा जताई।
मदर्स डे पर सामने आई यह घटना एक ओर समाज की कड़वी सच्चाई दिखाती है, तो दूसरी ओर यह भी साबित करती है कि आज भी इंसानियत जिंदा है। पूर्व पार्षद मनोज विश्नोई ने जिस तरह एक अनजान बुजुर्ग महिला के लिए बेटे का फर्ज निभाया, वह समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।

