फोन वाली टिकट का फॉर्मूला भी फेल! सूचना लीक होते ही फूटे पटाखे, बागियों ने ठोकी ताल, युवा-महिलाओं को कितनी मिली तरजीह?
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फोन वाली टिकट का फॉर्मूला भी फेल! सूचना लीक होते ही फूटे पटाखे, बागियों ने ठोकी ताल, युवा-महिलाओं को कितनी मिली तरजीह?

Aug 30, 2026

 

बीकानेर. नगर निगम चुनाव में बगावत रोकने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने इस बार प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बजाय फोन पर टिकट की सूचना देने का रास्ता अपनाया। चयनित दावेदारों को फोन करके नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए गए, लेकिन टिकट वितरण का यह गोपनीय फॉर्मूला भी सियासी हलचल और असंतोष को रोक नहीं पाया।

 

 

प्रत्याशियों के पास टिकट मिलने का फोन आते ही कई वार्डों में समर्थकों ने पटाखे फोड़े, थालियां बजाईं और बड़ी-बड़ी लाइटें लगाकर चुनाव कार्यालय खोल दिए। प्रत्याशियों ने मालाएं पहनकर जगह-जगह स्वयं ही टिकट मिलने की सूचना साझा करनी शुरू कर दी। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि जब फोन पर दी गई जानकारी को गोपनीय नहीं रखा जा सका तो पार्टियों ने प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची जारी क्यों नहीं की?

 

 

सूचना पहुंचते ही दावेदारों ने दिखाए बगावती तेवर

फोन पर टिकट मिलने की खबर कुछ ही समय में उसी वार्ड से आवेदन करने वाले दूसरे दावेदारों तक भी पहुंच गई। टिकट नहीं मिलने से नाराज कई नेताओं ने शाम होते-होते बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए। कुछ दावेदारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी के साथ जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है।

 

 

कई वार्डों में नाराज कार्यकर्ता और समर्थक जनप्रतिनिधियों के घरों तक पहुंच गए तथा टिकट वितरण के फैसले पर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि नामांकन के लिए अब बेहद कम समय शेष रहने के कारण टिकट बदलने की संभावनाएं भी कमजोर मानी जा रही हैं।

 

 

विरोध वाले वार्डों में मिल रहा इंतजार का आश्वासन

सूत्रों के अनुसार, जिन वार्डों में टिकट को लेकर ज्यादा विरोध सामने आ रहा है, वहां भाजपा और कांग्रेस के नेता नाराज दावेदारों से बातचीत कर रहे हैं। उन्हें मामला विचाराधीन होने और कुछ समय इंतजार करने का आश्वासन दिया जा रहा है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ वार्डों में अंतिम समय पर प्रत्याशी बदले जा सकते हैं या यह कवायद केवल नाराज नेताओं को मनाने तक सीमित रहेगी?

 

 

नामांकन प्रक्रिया में केवल एक दिन शेष रहने से अगला दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फोन पर टिकट की सूचना पाने वाले अधिकतर प्रत्याशी नामांकन दाखिल करेंगे और उन्हें पार्टी का चुनाव चिह्न भी आवंटित किया जाएगा। इसके बाद टिकट बदलने की गुंजाइश लगभग समाप्त हो सकती है।

 

 

युवाओं और महिलाओं को कितने टिकट?

टिकट वितरण से पहले दोनों प्रमुख दलों ने युवाओं, महिलाओं और नए चेहरों को प्राथमिकता देने की बात कही थी। अब प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद यह भी चर्चा का विषय है कि वास्तव में कितने युवाओं और महिलाओं को अवसर दिया गया है।

 

 

कई वार्डों के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अंतिम समय में उनकी दावेदारी को दरकिनार कर दिया गया। उनका कहना है कि नए और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका देने के दावों के बावजूद दोनों पार्टियों ने बड़ी संख्या में पुराने और स्थापित नेताओं पर ही भरोसा जताया है।

 

 

अब सभी की निगाहें नामांकन के अंतिम दिन पर टिकी हैं। इसी दिन स्पष्ट होगा कि फोन वाली टिकट में कोई बदलाव होता है या घोषित माने जा रहे प्रत्याशी ही पार्टी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरेंगे। साथ ही यह तस्वीर भी साफ होगी कि टिकट से वंचित दावेदार पार्टी के साथ रहते हैं या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मुकाबले को रोचक बनाते हैं।