सूई पर सबसे छोटी पगड़ी बांधने वाले कृष्णचंद पुरोहित को मिला हिन्दुस्तान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान
Bikaner News

सूई पर सबसे छोटी पगड़ी बांधने वाले कृष्णचंद पुरोहित को मिला हिन्दुस्तान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान

Jun 1, 2026

 

बीकानेर. बीकानेर की पारंपरिक साफा-पगड़ी कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले कृष्णचंद पुरोहित को उनकी अनूठी कला और सांस्कृतिक योगदान के लिए हिन्दुस्तान बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा सम्मानित किया गया। जयपुर के खातीपुरा स्थित स्वर्ण महल बैंक्वेट हॉल में आयोजित समारोह में उन्हें सूई पर दुनिया की सबसे छोटी पगड़ी बांधने, पेंसिल पर पगड़ी बनाने तथा बीकानेर की ऐतिहासिक सौहार्द परंपरा ‘चन्दा’ के संरक्षण के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

 

 

समारोह में देश-विदेश से आए कलाकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और समाजसेवियों को भी विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मलेशिया, सिंगापुर, नेपाल और भूटान सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथियों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी वीरेन्द्र सिंह बंकावत, डॉ. संजय ग्रेवाल, पियुष किराडू, प्रोफेसर राज के. महेश्वरी, अभिषेक सोनी, घनश्याम सोनी, कपिल शर्मा तथा पूजा तौमर शामिल रहे।

 

 

बीकानेर लौटने पर कृष्णचंद पुरोहित का विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा अभिनंदन किया गया। राजस्थानी साफा-पाग-पगड़ी एवं कला-संस्कृति संस्था के कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में उनके योगदान को सराहा गया।

 

 

संस्था के अध्यक्ष राजेश रंगा ने बताया कि कृष्णचंद पुरोहित ने सूई पर पगड़ी बांधकर राजस्थान का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि यह पगड़ी महज 5 सेंटीमीटर आकार की सूई पर 55 सेकंड में बांधी गई। इसके लिए केवल 15 सेंटीमीटर कपड़े का उपयोग किया गया तथा पगड़ी की परिधि लगभग 0.65 सेंटीमीटर मापी गई। इतनी सूक्ष्म और बारीक कला का प्रदर्शन अत्यंत कठिन है और यह उनकी वर्षों की साधना का परिणाम है।

 

 

संस्था के उपाध्यक्ष गौरीशंकर व्यास ने कहा कि कृष्णचंद पुरोहित ने बीकानेर की साफा-पगड़ी परंपरा को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि बीकानेर की लगभग 500 वर्ष पुरानी सौहार्द की प्रतीक ‘चन्दा’ पतंग परंपरा को जीवित रखने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यही कारण है कि उन्हें पगड़ी कला और चन्दा परंपरा दोनों के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।

 

 

श्यामसुंदर किराडू और उमेश पुरोहित ने कहा कि सूई पर पगड़ी बांधने जैसी अनूठी कला का प्रदर्शन कर कृष्णचंद पुरोहित ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे छोटी पगड़ी होने का जो दावा किया गया था, वह आज सम्मान के रूप में साकार हो गया है। संस्था के सभी सदस्यों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

 

 

इस अवसर पर विजय कुमार पुरोहित, रामचंद्र आचार्य, अभिषेक आचार्य, कैलाश सुथार, राजेश रंगा, विमल किशोर व्यास, तपेश सुथार, दीपेश सुथार, लाला जोशी, उमेश पुरोहित, श्यामसुंदर किराडू, गौरीशंकर व्यास, मरूधर बोहरा, नंदकिशोर रंगा, महेंद्र आचार्य, शिवरतन आचार्य, पवन पुरोहित, महेश पुरोहित, मोहित पुरोहित, आदित्य पुरोहित, अभिषेक पुरोहित, शरद जोशी, आनंद जोशी, नमन जोशी और घनश्याम ओझा सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे।

 

 

कृष्णचंद पुरोहित की यह उपलब्धि न केवल बीकानेर बल्कि पूरे राजस्थान की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है।