10 साल बाद निगम की सत्ता से बाहर भाजपा, कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत, क्या महावीर रांका की नाराजगी पड़ी भारी?
बीकानेर. बीकानेर नगर निगम चुनाव की मतगणना सोमवार को राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। मतगणना शुरू होते ही कांग्रेस ने बढ़त बना ली और अंतिम परिणाम आने तक स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 27 सीटों से संतोष करना पड़ा। शेष 11 सीटों पर निर्दलीय एवं अन्य प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस ने नगर निगम में अपना मेयर बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। लंबे इंतजार के बाद बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनने का रास्ता साफ हुआ है। चुनाव परिणामों से उत्साहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें लंबे समय से इस दिन का इंतजार था।
दूसरी ओर, भाजपा भी चुनावी नतीजों के बाद सक्रिय हो गई है। राजनीतिक गलियारों में भाजपा नेताओं की निर्दलीय पार्षदों से बातचीत की चर्चाएं हैं। हालांकि कांग्रेस के पास बहुमत का आवश्यक आंकड़ा होने के कारण फिलहाल उसका बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है।
लगातार 10 साल से निगम की सत्ता में थी भाजपा
बीकानेर नगर निगम में भाजपा लगातार दस वर्षों से अपना बोर्ड बनाए हुए थी। इस बार चुनाव परिणामों ने शहर की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल दिया। कांग्रेस की जीत के साथ नगर निगम में भाजपा का दस साल पुराना दबदबा समाप्त हो गया है। ऐसे में पार्टी को अब अपनी हार के कारणों पर मंथन करना होगा।
राजनीतिक जानकार भाजपा की हार के पीछे टिकट वितरण, आंतरिक असंतोष, बागी उम्मीदवारों और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी सहित कई कारण बता रहे हैं। कुछ वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा के चुनावी समीकरण बिगाड़ दिए।
क्या महावीर रांका का टिकट काटना पड़ा भारी?
भाजपा की हार के बाद सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका की टिकट काटे जाने की हो रही है। महावीर रांका ने वार्ड नंबर 75 से टिकट के लिए आवेदन करने के साथ नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह विशाल गोलछा को उम्मीदवार बनाया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले का प्रभाव केवल वार्ड नंबर 75 तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के कई वार्डों में भी भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि भाजपा की हार के लिए केवल एक फैसले को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद शहर की राजनीति में यह सवाल जरूर उठ रहा है—क्या बीकानेर भाजपा में महावीर रांका का प्रभाव पार्टी के अनुमान से कहीं अधिक है?
अब सबकी निगाह कांग्रेस की मेयर पद की दावेदारी और भाजपा की चुनावी हार को लेकर होने वाले संगठनात्मक मंथन पर टिकी हुई है।

