बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर करना होगा प्रयास
Bikaner News

बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर करना होगा प्रयास

Sep 30, 2026

बीकानेर. बच्चों का बेहतर भविष्य केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। उन्हें सुरक्षित वातावरण, मानसिक सहारा, पोषण, स्वास्थ्य, सही मार्गदर्शन और अपनी बात खुलकर रखने का अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है। बच्चों से जुड़े इन मुद्दों के समाधान के लिए परिवार, स्कूल, समाज और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। यह बात बुधवार को प्रौढ़ शिक्षा भवन में राजस्थान फोर्सेज एवं उरमूल सीमांत समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बीकानेर जोनल फोर्सेज नेटवर्क की बैठक में इको सिस्टम मैनेजर रामप्रसाद हर्ष ने कही।

 

 

हर्ष ने कहा कि बच्चों की प्रारंभिक अवस्था में देखभाल बेहद आवश्यक है। बीकानेर जिले में बच्चों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए नेटवर्क से जुड़ी सभी संस्थाएं एकजुट होकर आवाज उठा सकती हैं। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से समस्याओं को सामने लाकर उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

 

 

बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के मुकेश व्यास ने कहा कि बच्चों पर सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण उनमें मानसिक तनाव और भावनात्मक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। बच्चों की समस्याओं को समझने और समय रहते उनका समाधान करने के लिए परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर प्रयास करना होगा।

 

 

नोखा से उरमूल ज्योति के सचिव चेतनराम गोदारा ने कहा कि सभी संस्थाएं एक साथ खड़ी होकर बच्चों के मुद्दों को लेकर आवाज उठाएंगी तो यह अपने आप में बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को जिन सुविधाओं की आवश्यकता है, उनमें से कई सुविधाएं उन्हें पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रही हैं। इनके लिए सभी संस्थाओं को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे।

 

 

उरमूल सीमांत के अशोक भाटी ने कहा कि बच्चों के लिए केवल स्कूल जाना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा की गुणवत्ता, सीखने की क्षमता, कौशल विकास और भविष्य में रोजगार के लिए तैयारी भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।

 

 

जन शिक्षण संस्थान के निदेशक ओमप्रकाश सुथार ने कहा कि माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी के कारण कई बार बच्चे अपनी परेशानियां खुलकर नहीं बता पाते। बच्चों की मानसिक एवं भावनात्मक समस्याओं को केवल “उम्र का असर” मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रारंभ से ही अच्छे संस्कार, सही मार्गदर्शन और जिम्मेदारी की भावना देकर उन्हें समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सकता है।

 

 

अजीत फाउंडेशन के प्रतिनिधि महेश उपाध्याय ने बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए कहा कि गरीबी और सामाजिक असमानता के कारण कई बच्चों को पर्याप्त पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। उन्होंने बाल मजदूरी, बाल विवाह, घरेलू हिंसा, शोषण, तस्करी और बुलिंग जैसी समस्याओं के प्रति समाज को गंभीरता से काम करने की आवश्यकता बताई।

 

 

इस मौके पर प्लान इंडिया के फतेह सिंह भाटी, एफईएस के बीरबल राज, मरू शक्ति संस्थान के बुद्धराम, उरमूल ट्रस्ट के रेवंतराम, उरमूल सेतु के मालाराम, डेजर्ट रिसोर्स सेंटर के भोजराज सिंह तथा परंपरा से चंद्रकला व्यास सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

 

बैठक में बच्चों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए उनके सुरक्षित, स्वस्थ और बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

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