मनुस्मृति पर समर्थन-विरोध के बीच खुली बहस, अभिव्यक्ति की सीमा से लेकर नारी सम्मान और समानता तक पर हुआ मंथन
Bikaner News Dharm Karam

मनुस्मृति पर समर्थन-विरोध के बीच खुली बहस, अभिव्यक्ति की सीमा से लेकर नारी सम्मान और समानता तक पर हुआ मंथन

Oct 4, 2026

बीकानेर. पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति की ओर से शिक्षाविद् स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय विचार गोष्ठी ‘मनुस्मृति समर्थन या विरोध कितना उचित?’ का रविवार को समापन हुआ। दूसरे दिन तृतीय और चतुर्थ सत्र में वक्ताओं ने मनुस्मृति के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे। इस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक समानता, नारी की स्थिति, शिक्षा, पर्यावरण और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में मनुस्मृति की प्रासंगिकता पर चर्चा हुई।

 

 

वक्ताओं ने कहा कि किसी भी ग्रंथ या विचार की विवेचना करते समय देश, काल और परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। चर्चा में मनुस्मृति को धर्मशास्त्र के साथ अर्थशास्त्र और दंडशास्त्र के संदर्भ में भी देखने की बात कही गई।

 

 

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा पर चर्चा

विचार गोष्ठी में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के वर्तमान स्वरूप पर भी मंथन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका उपयोग ऐसी सीमा में होना चाहिए जिससे समाज का अहित न हो। आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज और युवा पीढ़ी के सामने प्रस्तुत की जा रही सामग्री की उपयुक्तता पर भी विचार करने की आवश्यकता बताई गई।

 

 

वक्ताओं के अनुसार मनुस्मृति में वर्ण के आधार पर विशेषज्ञों को अपने विचार समाज के सामने रखने और शिक्षा-संस्कार के प्रसार की बात कही गई है। हालांकि वर्तमान सामाजिक एवं संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में इसकी व्याख्या और प्रासंगिकता को लेकर अलग-अलग मत भी सामने आए।

 

 

संविधान और मनुस्मृति को लेकर भी उठे सवाल

गोष्ठी में पक्ष-विपक्ष के वक्ताओं के बीच यह सवाल भी चर्चा का विषय रहा कि जो लोग मनुस्मृति का समर्थन करते हैं, क्या वे इसे पूरी तरह स्वीकार करते हैं और जो इसका विरोध करते हैं, क्या वे इसके प्रत्येक पक्ष के विरोध में हैं। विपक्ष की ओर से यह प्रश्न रखा गया कि जब भारतीय संविधान नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, तो किसी प्राचीन ग्रंथ की ओर लौटना क्यों आवश्यक है।

 

 

वक्ताओं ने स्त्री शिक्षा और समाज में महिलाओं की उचित स्थिति के विषय पर भी विचार रखे। मनुस्मृति के विभिन्न प्रावधानों का तुलनात्मक अध्ययन करने तथा उसके मूल संदेश को वर्तमान संदर्भ में समझने की आवश्यकता बताई गई।

पर्यावरण और सामाजिक दायित्व पर भी मंथन

गोष्ठी में पर्यावरण और प्रदूषण जैसे समकालीन विषयों को भी मनुस्मृति के संदर्भ में देखा गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज और पर्यावरण के प्रति व्यक्ति के दायित्वों को समझना वर्तमान समय में भी महत्वपूर्ण है। स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और मर्यादा के संतुलन पर भी विचार व्यक्त किए गए।

 

 

प्रथम सत्र की अध्यक्षता आचार्य रविंद्र ने की और संचालन आचार्य शिवनाथ ने किया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुरेंद्र कुमार ने की तथा संचालन डॉ. दीपक आर्य ने किया।

 

 

दोनों सत्रों में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर शत्रुंजय, डॉ. पुनीत चोपड़ा, ऋतु शर्मा, आचार्य रविशंकर, आचार्या शीतल, मुनि सत्यजीत, आचार्य रविंद्र और आचार्य डॉ. निरंजन लाल सहित अन्य विद्वानों ने विचार रखे। वक्ताओं ने मनुस्मृति को लेकर मौजूद विभिन्न भ्रांतियों और जिज्ञासाओं पर भी चर्चा की।

 

 

भजन संध्या के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के दौरान शिक्षाविद् स्वर्गीय रामनारायण स्वामी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अंत में सत्संग एवं भजन संध्या का आयोजन हुआ। इसके बाद आर्ष न्यास एवं वैदिक शोध संस्थान के पदाधिकारियों की ओर से कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों का सम्मान किया गया तथा आयोजन में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया।

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