लाल पाड़ की साड़ियों में सजीं महिलाएं, शंख ध्वनि से गूंजा बंगाली मंदिर; दुर्गा अष्टमी पर उमड़े श्रद्धालु
बीकानेर. बीकानेर के बंगाली मंदिर में सोमवार को दुर्गा अष्टमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और बंगाली संस्कृति की पारंपरिक छटा के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना, पारंपरिक अनुष्ठान, शंख वादन प्रतियोगिता, धुनी पूजा और महाआरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लाल पाड़ वाली पारंपरिक साड़ियों में सोलह शृंगार कर पहुंचीं महिलाओं ने उत्सव की रौनक बढ़ाई। शंख ध्वनि और मां दुर्गा के जयकारों से मंदिर परिसर दिनभर भक्तिमय बना रहा।
कोलकाता से आए पंडित ने करवाए अनुष्ठान
दुर्गा अष्टमी के कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह पारंपरिक बलि अनुष्ठान के साथ हुई। इसके बाद मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए गए। पूजा के लिए कोलकाता से आए पंडित काजोल चक्रवर्ती ने बंगाली परंपरा के अनुसार विधि-विधान से अनुष्ठान करवाए।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को कमल के फूल अर्पित किए और फल सहित विभिन्न सामग्री का भोग लगाया। भक्तों ने मां के समक्ष शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की कामना की।
लाल पाड़ की साड़ियों में पहुंचीं महिलाएं
दुर्गा अष्टमी पर बंगाली समुदाय की महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक लाल पाड़ वाली सफेद साड़ियां पहनकर और सोलह शृंगार कर मंदिर पहुंचीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने बंगाली संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की।
महिलाओं ने सामूहिक रूप से मां दुर्गा की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। हाथों में मेहंदी लगाए महिलाओं ने धार्मिक आयोजनों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति और उल्लास का माहौल रहा।
शंख वादन प्रतियोगिता ने बांधा समां
धार्मिक आयोजनों के बीच मंदिर में शंख वादन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें महिला और पुरुष प्रतिभागियों ने भाग लिया। शंख की गूंज के बीच मां दुर्गा के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा।
बंगाली परंपरा में धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शंख वादन का विशेष महत्व है। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया और श्रद्धालुओं ने उनका उत्साह बढ़ाया। आयोजन के माध्यम से बंगाली समुदाय की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
श्रद्धालुओं को वितरित किया प्रसाद
दोपहर में मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस दौरान पूरी-सब्जी और चटनी का प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया।
महाआरती के बाद हुई धुनी पूजा
शाम को मां दुर्गा की महाआरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने मां की आराधना की और जयकारे लगाए। इसके बाद बंगाली परंपरा के अनुसार धुनी पूजा आयोजित हुई, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
शंख ध्वनि, आरती और पारंपरिक पूजा-पद्धति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों में बंगाली समुदाय के लोगों की भागीदारी रही।
आस्था के साथ संस्कृति की विरासत भी जीवंत
बंगाली मंदिर में दुर्गा अष्टमी का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता का भी प्रतीक बना। पारंपरिक पूजा-अर्चना, लाल पाड़ की साड़ियों में सजी महिलाएं, शंख वादन प्रतियोगिता, धुनी पूजा और महाआरती ने उत्सव को खास बना दिया।
इस आयोजन के जरिए बंगाली समुदाय ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा। मां दुर्गा की भक्ति में सराबोर मंदिर परिसर में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।

