ईरान अमेरिका की लड़ाई में इस देश में पेट्रोल डीजल खत्म, ऊर्जा न मिलने से अंधेरे में डूबा देश
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ईरान अमेरिका की लड़ाई में इस देश में पेट्रोल डीजल खत्म, ऊर्जा न मिलने से अंधेरे में डूबा देश

May 15, 2026

नईदिल्ली. ईरान अमेरिका जंग के बीच कई देश तेल की किल्लत से जूझ रहे हैं. कई देशों में दाम बढ़ गए हैं, राशनिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसे नियम बनने लगे हैं. इस हाहाकार के बीच एक देश में पेट्रोल-डीजल पूरी तरह खत्म हो गया है. 22 घंटों से ये देश घुप अंधेरे में डूबा हुआ है और हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वहां की सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं. ये देश क्यूबा है, जिसे अमेरिका ने पहले ही खोखला कर दिया था और अब मिडिल ईस्ट के हालातों ने पूरी तरह घुटनों पर ला दिया है।

 

क्यूबा के ऊर्जा मंत्री विसेंट डी ला ओ लेवी ने राष्ट्रीय टीवी पर स्वीकार किया कि देश के पास अब डीजल और फ्यूल ऑयल का कोई पर्याप्त रिजर्व नहीं बचा है। इस बयान के बाद पूरे देश में चिंता और घबराहट का माहौल फैल गया। ईंधन की कमी के कारण बिजली उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और राष्ट्रीय बिजली ग्रिड लगभग वेंटिलेटर पर पहुंच चुका है।

 

 

बिजली संकट का असर अस्पतालों, स्कूलों और जल आपूर्ति जैसी जरूरी सेवाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में बच्चे मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, वहीं अस्पतालों में मशीनें चलाने के लिए जेनरेटर का सहारा लिया जा रहा है। पानी की सप्लाई बाधित होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

विशेषज्ञों के अनुसार क्यूबा की इस स्थिति के पीछे अमेरिका के कड़े प्रतिबंध भी बड़ी वजह माने जा रहे हैं। जनवरी 2026 में अमेरिका ने उन देशों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी जो क्यूबा को तेल सप्लाई करेंगे। इसके बाद मेक्सिको और वेनेजुएला जैसे देशों ने भी तेल आपूर्ति कम कर दी, जिससे क्यूबा की सप्लाई लाइन लगभग टूट गई।

 

 

इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। महंगे तेल और परिवहन लागत ने क्यूबा जैसे छोटे देश के लिए ईंधन खरीदना लगभग असंभव बना दिया है।

 

 

ऊर्जा संकट का असर क्यूबा के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। होटल खाली पड़े हैं, सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और कई फैक्ट्रियां बंद होने लगी हैं। पूरे देश में अनिश्चितता और भय का माहौल बना हुआ है।

 

 

संयुक्त राष्ट्र ने भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि आर्थिक प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। वहीं क्यूबा सरकार ने दुनिया के देशों से मदद की अपील करते हुए कहा है कि जो भी देश तेल उपलब्ध कराने में मदद करेगा, उसका स्वागत किया जाएगा।