बीकानेर में टिकट की ‘जंग’: BJP में दो खेमों के अपने-अपने दावेदार, किसकी सुनेगा आलाकमान?
बीकानेर. नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड आरक्षण की लॉटरी निकलने के बाद अब चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। आरक्षण तय होते ही भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। दोनों ही दल जमीन से जुड़े और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं, लेकिन बीकानेर की सियासी जमीन पर टिकट वितरण से पहले ही नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।
कांग्रेस ने टिकट के दावेदारों से ऑनलाइन आवेदन मांगने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी ने इसके लिए पोर्टल और क्यूआर कोड का सहारा लिया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ वार्डों में कांग्रेस को मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार तलाशने में मशक्कत करनी पड़ सकती है। ऐसे में पार्टी के सामने आवेदन लेने के साथ प्रत्येक वार्ड में मजबूत चेहरे की पहचान करना भी बड़ी चुनौती होगी।
पश्चिम में भाजपा की राह ज्यादा मुश्किल?
सबसे दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर दिखाई दे रही है। यहां नगर निगम चुनाव के टिकटों को लेकर अलग-अलग खेमों की सक्रियता खुलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। पार्टी से जुड़े एक प्रभावशाली नेता के समर्थक अलग-अलग वार्डों में संभावित उम्मीदवारों के नाम और फोटो सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। कई पोस्ट में भाजपा के चुनाव चिह्न के साथ दावेदारी का संकेत भी दिया जा रहा है।
दूसरी तरफ विधायक खेमे से जुड़े और परिवार के करीबी माने जाने वाले लोग भी अलग-अलग वार्डों से अपने समर्थकों की दावेदारी सामने ला रहे हैं। सोशल मीडिया पर संभावित प्रत्याशियों को लेकर लगातार पोस्ट सामने आने से टिकट वितरण से पहले ही खेमेबंदी की चर्चा तेज हो गई है।
टिकट किसकी सिफारिश पर?
यही सबसे बड़ा सवाल अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी नेतृत्व टिकट वितरण के दौरान किसके फीडबैक को ज्यादा महत्व देता है। यदि किसी एक खेमे की दावेदारी को ज्यादा तवज्जो मिलती है और दूसरे खेमे के प्रमुख दावेदार टिकट से वंचित रहते हैं तो असंतोष उभरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
नगर निगम का चुनाव वार्ड स्तर पर लड़ा जाता है, जहां प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में टिकट वितरण के बाद भीतरघात या कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता किसी भी पार्टी के चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि भाजपा के लिए बीकानेर पश्चिम में टिकट वितरण केवल प्रत्याशी चुनने का मामला नहीं, बल्कि अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन साधने की परीक्षा भी बन सकता है।
आलाकमान तक पहुंच रहा फीडबैक
पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार बीकानेर के वार्डों में चल रही टिकट दावेदारी और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों का फीडबैक प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच रहा है। माना जा रहा है कि टिकटों पर अंतिम फैसला करने से पहले संगठन स्थानीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से अलग-अलग स्तर पर राय ले सकता है। जरूरत पड़ने पर नाराजगी की आशंका वाले नेताओं से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश भी की जा सकती है।
वहीं विधायक खेमा भी अपने समर्थक और मजबूत माने जा रहे दावेदारों को लेकर पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने में जुटा है। ऐसे में आने वाले दिनों में बीकानेर पश्चिम की राजनीति और दिलचस्प हो सकती है।
फिलहाल टिकट घोषित नहीं हुए हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आ रहे नाम केवल दावेदारी और समर्थकों की ओर से की जा रही पैरवी तक सीमित हैं। असली तस्वीर पार्टी की आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही साफ होगी। लेकिन इतना तय है कि इस बार बीकानेर नगर निगम चुनाव में मुकाबला सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस का नहीं होगा, बल्कि टिकट वितरण के दौरान दोनों दलों की अंदरूनी सियासत भी चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है।

