मनुस्मृति पर विद्वानों का मंथन, वर्ण व्यवस्था और नारी स्वतंत्रता पर हुई गहन चर्चा
Bikaner News Dharm Karam

मनुस्मृति पर विद्वानों का मंथन, वर्ण व्यवस्था और नारी स्वतंत्रता पर हुई गहन चर्चा

Oct 3, 2026

बीकानेर. शिक्षाविद् एवं समाजसेवी स्वर्गीय रामनारायण स्वामी की स्मृति में आयोजित दो दिवसीय मनुस्मृति विद्वत विचार गोष्ठी का शनिवार को शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन शास्त्रों के ज्ञाता, विषय विशेषज्ञों एवं विद्वानों के दो सत्र आयोजित किए गए। इनमें मनुस्मृति के विभिन्न पक्षों के साथ विशेष रूप से वर्ण व्यवस्था, नारी स्वतंत्रता, दंड व्यवस्था, झूठी गवाही और अपराध जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

 

 

प्रथम सत्र की अध्यक्षता फरीदाबाद से आए आचार्य डॉ. निरंजनलाल मंगल ने की, जबकि द्वितीय सत्र की अध्यक्षता कन्या गुरुकुल रोजड़ से आईं आचार्य शीतल ने की। विभिन्न सत्रों में रोजड़ के डॉ. दीपक आर्य, कानपुर के उत्कर्ष आर्य, बीकानेर की डॉ. चंचल पाठक, इलाहाबाद के डॉ. प्रेम शंकर सिंह, बीकानेर की डॉ. नंदिता सिंघवी, हैदराबाद के आचार्य हरिप्रसाद, गुरुग्राम के डॉ. सुरेंद्र कुमार, फलोदी के केसरमल, बीकानेर के नीरज श्रीवास्तव, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. शिवलोचन शांडिल्य तथा हमीरपुर के आचार्य रविंद्र आचार्य सहित अन्य विद्वानों ने अपने विचार रखे।

 

 

मनुस्मृति पर अपने अध्ययन के आधार पर डॉ. सुरेंद्र कुमार ने विभिन्न संदर्भों एवं प्रमाणों के साथ इसके पक्ष और विपक्ष से जुड़े विचार प्रस्तुत किए। उपस्थित प्रबुद्धजनों ने भी वक्ताओं से प्रश्न पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान किया।

 

 

परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मनुस्मृति जिस प्राचीन सामाजिक परिवेश में सामने आई, उस समय समाज की संरचना, परिवार व्यवस्था, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, शासन, न्याय व्यवस्था तथा स्त्री-पुरुष की सामाजिक भूमिकाएं वर्तमान समय से अलग थीं। ऐसे में प्राचीन सामाजिक नियमों को वर्तमान संदर्भ में देखने के लिए उस समय की परिस्थितियों के साथ-साथ आज की सामाजिक आवश्यकताओं और न्याय की वर्तमान समझ को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

 

 

गोष्ठी में मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था एवं नारी स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधानों पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए। साथ ही दंड व्यवस्था, झूठी गवाही और अपराध से संबंधित व्यवस्थाओं का भी शास्त्रीय संदर्भों के आधार पर विवेचन किया गया।

 

 

कार्यक्रम के अंत में भजन-सत्संग का आयोजन हुआ। इसमें आर्य उत्तम ने भजनों की प्रस्तुति दी। आयोजन में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन एवं श्रोता उपस्थित रहे।

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