37 साल से बेकार था हाथ, एक सर्जरी ने लौटाई बाबूलाल की रोजी-रोटी
Bikaner News

37 साल से बेकार था हाथ, एक सर्जरी ने लौटाई बाबूलाल की रोजी-रोटी

Sep 16, 2026

 

बीकानेर. जिस हाथ की गंभीर विकृति ने बाबूलाल को करीब 37 वर्षों तक दूसरों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया, उसी हाथ से अब वह मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का सहारा बन रहे हैं। महज आठ माह की उम्र में चूल्हे में गिरने से झुलसे बाबूलाल के हाथ को एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. अजयपाल चौधरी ने जटिल सर्जरी के जरिए नया आकार दिया है। ऑपरेशन के बाद हाथ की कार्यक्षमता में सुधार होने से 38 वर्षीय बाबूलाल अब अपने दैनिक काम करने के साथ आजीविका भी कमा पा रहे हैं।

 

 

 

बचपन का हादसा बना जीवनभर की परेशानी

बाबूलाल जब आठ माह के थे, तब अचानक चूल्हे में गिर गए थे। हादसे में उनका दायां हाथ बुरी तरह झुलस गया। समय बीतने के साथ हाथ में गंभीर विकृति विकसित हो गई। इसका असर केवल उनकी शारीरिक क्षमता पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के कार्यों और रोजगार पर भी पड़ा।

 

 

करीब 37 वर्षों तक वह इस परेशानी के साथ जीवन जीते रहे। हाथ की सीमित कार्यक्षमता के कारण उन्हें सामान्य काम करने और आजीविका कमाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आखिरकार सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उन्हें उपचार की उम्मीद मिली।

 

 

तीन तकनीकों से हाथ को दिया नया आकार

प्लास्टिक सर्जन डॉ. अजयपाल चौधरी ने बाबूलाल के हाथ की जांच करने के बाद जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान बोन ग्राफ्टिंग, टेंडन की लंबाई बढ़ाने और फ्लैप कवरेज जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

 

 

इन प्रक्रियाओं के माध्यम से विकृत हाथ को नया आकार देने के साथ उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया। सफल सर्जरी और उपचार के बाद बाबूलाल के हाथ की स्थिति में सुधार आया तथा वह पहले की तुलना में कई कार्य स्वयं करने लगे।

 

 

अब मजदूरी कर बन रहे परिवार का सहारा

सर्जरी के बाद बाबूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। हाथ की कार्यक्षमता बेहतर होने से अब वह अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रहे हैं। साथ ही मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करने में भी सक्षम हो गए हैं। वर्षों पुरानी शारीरिक बाधा से राहत मिलने के बाद वह आत्मनिर्भरता के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।

 

 

एसएसबी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजीव बुरी ने कहा कि लंबे समय से हाथ की विकृति के साथ जीवन जी रहे बाबूलाल का सफल उपचार अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। किसी मरीज को कार्यात्मक रूप से आत्मनिर्भर बनाना पूरी चिकित्सा टीम के लिए संतोष और गौरव की बात है।

 

 

मरीजों को मिल रहा सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का लाभ

एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के तहत अस्पताल में इस प्रकार की जटिल प्लास्टिक सर्जरी की जा रही हैं। आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वर्षों पुरानी विकृतियों को सुधारकर मरीजों की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।

 

 

ऑपरेशन में निश्चेतन विभागाध्यक्ष डॉ. कांता भाटी, डॉ. सोनाली धवन, डॉ. शिवा तंवर तथा ऑपरेशन थिएटर के स्टाफ ने सहयोग किया। उपचार प्रक्रिया में ओपीडी स्टाफ की अनीता चाहर और सुरेश आचार्य की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।