दिल्ली की गणतंत्र दिवस परेड में दिखी बीकानेर की उस्ता कला की झांकी, विदेशी मेहमानों ने सराहा

बीकानेर. देश की राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सामरिक शक्ति के साथ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। जैसे ही राजस्थान की झांकी कर्तव्य पथ से गुजरी, दर्शकों और विशिष्ट अतिथियों ने तालियां बजाकर उसका स्वागत किया। पारंपरिक परिधानों में सजे लोक कलाकारों के उत्साह ने ‘पधारो म्हारे देश’ की भावना को साकार कर दिया।
इस अवसर पर राजस्थान की झांकी ‘राजस्थान – मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श (Golden Touch of Desert)’ थीम पर आधारित रही, जिसने अपनी कलात्मक भव्यता से देश-विदेश के दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में तैयार इस झांकी ने राजस्थान की परंपरागत शिल्पकला, लोक संगीत और ऐतिहासिक विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
उस्ता कला बनी आकर्षण का केंद्र
झांकी के अग्रभाग और मध्य हिस्से में राजस्थान की पारंपरिक हस्तशिल्प कलाओं का सजीव चित्रण किया गया। विशेष रूप से बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला झांकी का प्रमुख आकर्षण रही। ऊंट की खाल पर की जाने वाली सुनहरी नक्काशी और बारीक कारीगरी ने मरुस्थलीय कला की विशिष्ट पहचान को उजागर किया।
झांकी को देखने आए विदेशी मेहमानों ने उस्ता कला की बारीकी, रंग संयोजन और पारंपरिक तकनीक की खुले दिल से सराहना की, जो राजस्थान की वैश्विक पहचान को और मजबूत करती नजर आई।
रावणहत्था की गूंज से सजा कर्तव्य पथ
राजस्थान के प्राचीन लोक वाद्य रावणहत्था के वादन और लोक कलाकारों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे कर्तव्य पथ को राजस्थानी रंग में रंग दिया। लोक संगीत की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
परंपरा के साथ विकास का संदेश
झांकी में एक ओर राजस्थान के ऐतिहासिक किलों और महलों की नक्काशीदार झलक दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर ‘विकसित राजस्थान’ की अवधारणा को भी दर्शाया गया। यह संदेश दिया गया कि राजस्थान अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

