केवल वर्षा जल से पोली हाउस स्थापित कर युवा किसान ने रचा नया कीर्तिमान, जिला कलेक्टर ने किया सम्मानित
श्रीडूंगरगढ़। राजस्थान के शुष्क और सीमित जल संसाधनों वाले क्षेत्र में जहां किसान पानी की कमी से जूझते हैं, वहीं श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के ग्राम धीरदेसर चोटियान के कृषि स्नातक युवा प्रगतिशील किसान रामलक्ष्मण चोटिया ने अपनी सोच, मेहनत और नवाचार से एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने केवल वर्षा जल संरक्षण के आधार पर पोली हाउस स्थापित कर यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो तो सीमित संसाधनों के बीच भी कृषि में नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।
रामलक्ष्मण ने वर्षा ऋतु में प्राप्त होने वाले पानी का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया और उसी संग्रहित जल का उपयोग करते हुए पोली हाउस में उन्नत खेती की शुरुआत की। आमतौर पर पोली हाउस जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों के लिए निरंतर जल उपलब्धता को आवश्यक माना जाता है, लेकिन रामलक्ष्मण ने इस धारणा को बदलते हुए केवल वर्षा जल के सहारे सफल खेती कर दिखाया।
उनकी इस अनूठी पहल ने न केवल स्थानीय किसानों का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी किसान उनके खेत पर पहुंचकर इस मॉडल को समझ रहे हैं। कई किसान इसे अपने क्षेत्रों में अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए यह मॉडल आशा की नई किरण बनकर उभरा है।
कृषि क्षेत्र में नवाचार, उत्कृष्ट कार्य और किसानों को जागरूक एवं प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जिला कलेक्टर ने रामलक्ष्मण चोटिया को सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद रामलक्ष्मण ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय होने के साथ-साथ भविष्य में और अधिक समर्पण के साथ किसान हित में कार्य करने की प्रेरणा भी है।
उन्होंने कहा कि कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि नई तकनीकों और जल संरक्षण के उपायों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग भी कर सकते हैं। उनका मानना है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए संसाधनों से अधिक जरूरी दृढ़ इच्छाशक्ति और नवाचार की सोच होती है।
आज जब जलवायु परिवर्तन और जल संकट कृषि के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं, तब रामलक्ष्मण चोटिया का यह प्रयास अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। वर्षा जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वय से उन्होंने यह संदेश दिया है कि भविष्य की खेती जल बचत और नवाचार पर आधारित होगी।
धीरदेसर चोटियान का यह युवा किसान अब पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण आधारित आधुनिक खेती के सफल मॉडल के रूप में पहचान बना चुका है। उनकी उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि यह उन हजारों किसानों के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कृषि में कुछ नया करने का सपना देखते हैं।

