व्यंग्य को सामाजिक चेतना का स्वर देने वाले ‘विनोद’ को साहित्यकारों ने किया स्मरण
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व्यंग्य को सामाजिक चेतना का स्वर देने वाले ‘विनोद’ को साहित्यकारों ने किया स्मरण

Aug 13, 2026

बीकानेर. हास्य को सहज संवेदना, व्यंग्य को सामाजिक चेतना और शब्दों को मानवीय सरोकारों की अभिव्यक्ति बनाने वाले साहित्यकार भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ की 92वीं जयंती पर सुरभि संस्था की ओर से साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया। समारोह में साहित्यकारों ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि ‘विनोद’ का साहित्य केवल हास्य-विनोद तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सामाजिक यथार्थ, विसंगतियों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक समरसता की गहरी चिंता दिखाई देती है।

 

 

 

वक्ताओं ने कहा कि भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ ने व्यंग्य को महज मनोरंजन का माध्यम न बनाकर समाज के आईने के रूप में इस्तेमाल किया। उनकी रचनाओं में सहज हास्य के साथ सामाजिक और व्यवस्थागत विसंगतियों पर पैनी नजर दिखाई देती है। यही वजह है कि उनका साहित्य आज भी प्रासंगिक है और पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करता है।

 

 

 

 

बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे ‘विनोद’

अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ बहुआयामी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। उन्होंने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी रचनाओं में जीवन के विविध रंगों के साथ समाज की वास्तविक तस्वीर भी दिखाई देती है। उनकी रचनात्मकता में संवेदना, सहजता और प्रभावशाली अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय था।

 

 

 

 

मुख्य अतिथि मधु आचार्य ने कहा कि व्यास के व्यंग्य में सहजता, विनम्रता और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सामाजिक विसंगतियों को इस तरह अभिव्यक्त किया कि पाठक मुस्कुराने के साथ-साथ उन परिस्थितियों पर विचार करने के लिए भी विवश होता है। उनके व्यंग्य में कटाक्ष के साथ मानवीय संवेदना जुड़ी हुई थी।

 

 

 

 

अप्रकाशित साहित्य को सामने लाना सच्ची श्रद्धांजलि

विशिष्ट वक्ता व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि ‘विनोद’ ने साहित्यिक व्यंग्य के माध्यम से समाज को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके साहित्य में सामाजिक सरोकारों के साथ गहरी मानवीय संवेदनशीलता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’ के व्यक्तित्व और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। उनके अप्रकाशित साहित्य को सामने लाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

 

 

 

समारोह में ‘विनोद’ के कृतित्व पर राजाराम स्वर्णकार, डॉ. नमामीशंकर आचार्य और ओमप्रकाश सारस्वत ने पत्र-पाठ किया। संस्था अध्यक्ष गोविन्द जोशी ने उनकी रचनाओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी।

 

 

 

रचनाओं के पाठ ने बांधा साहित्यप्रेमियों को

सुरभि संस्था के सचिव दिनेश उपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था की साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों की स्मृति को जीवित रखने का प्रभावी माध्यम उनकी रचनाओं का पाठ और उनके साहित्य पर सार्थक संवाद है।

 

 

 

 

समारोह में ‘विनोद’ की प्रतिनिधि रचनाओं का श्रोता-शैली में पाठ किया गया। राजेंद्र स्वर्णकार एवं विद्यासागर पंचारिया ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। उनके काव्य पाठ ने समारोह को साहित्यिक गरिमा प्रदान की।

 

 

 

सामाजिक सरोकारों से जुड़े व्यक्तित्वों का सम्मान

समारोह में साहित्य और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रेम नारायण व्यास, अंतर्यामी साहित्यिक सामायिक क्लब से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा चित्रकार योगेंद्र कुमार पुरोहित को ‘सुरभि सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। सम्मान स्वरूप शॉल, श्रीफल, पुस्तकें एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट किए गए।

 

 

 

 

इस अवसर पर डॉ. सुमन बिस्सा, सरोज बिस्सा, डॉ. विष्णुदत्त जोशी सहित अनेक साहित्यकार, रचनाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। उपस्थित जनों ने ‘विनोद’ के साहित्य को वर्तमान सामाजिक परिवेश में भी प्रासंगिक बताते हुए उनके साहित्य के व्यापक पाठ और पुनर्पाठ की आवश्यकता जताई।

 

 

 

 

कार्यक्रम का संचालन संजय पुरोहित एवं राजा सांखी ने किया। अंत में सुमित शर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया।