विवादित जमीन पर पार्क की चारदीवारी का काम शुरू, बारिश और बिजली गुल होने के बावजूद रात में जारी रहा निर्माण
Bikaner News

विवादित जमीन पर पार्क की चारदीवारी का काम शुरू, बारिश और बिजली गुल होने के बावजूद रात में जारी रहा निर्माण

Sep 27, 2026

बीकानेर. मुक्ताप्रसाद नगर में प्रस्तावित पार्क को लेकर जमीन विवाद गहराता जा रहा है। सेक्टर नंबर 14 में सामुदायिक भवन के पास बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से चारदीवारी निर्माण का काम शुरू किया गया है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, रात में बारिश और बिजली गुल होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।

 

 

वहीं जमीन पर मालिकाना हक का दावा कर रहे देवेन्द्र स्वामी ने निर्माण कार्य पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। स्वामी का कहना है कि जिस जमीन पर चारदीवारी बनाई जा रही है, वह खसरा नंबर 1055/365 में उनकी निजी भूमि है। मौके पर पूछताछ करने पर उन्हें बताया गया कि यहां सार्वजनिक पार्क बनाया जाना प्रस्तावित है।

 

 

 

57 लोगों ने कलेक्टर को दिया ज्ञापन

इसी मामले में देवेन्द्र स्वामी सहित 57 लोगों की ओर से 25 अगस्त 2026 को जिला कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया गया था। ज्ञापन में सेक्टर नंबर 7/61 के सामने प्रस्तावित पार्क में चारदीवारी, भ्रमण पथ, ब्लॉक और गेट निर्माण का काम रोकने की मांग की गई है।

 

 

प्रार्थीगण ने दावा किया है कि खसरा नंबर 1055/365 की भूमि पर उनका अधिकार है और यूआईटी बीकानेर में 9 नवंबर 2022 को 90-ए की कार्रवाई भी हो चुकी है। उनका कहना है कि भूमि का एक हिस्सा अभी भी खातेदारी में है।

 

 

हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला

ज्ञापन में प्रार्थीगण ने आवासन मंडल के साथ भूमि को लेकर चले पुराने विवाद का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि राजस्थान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में निर्णय हो चुके हैं। उन्होंने 4 सितंबर 2019 के प्रशासनिक पत्राचार और भूमि की तरमीम से संबंधित आदेशों का भी हवाला दिया है।

 

 

प्रार्थीगण का आरोप है कि अब उनकी भूमि को खसरा नंबर 762 बताकर वहां पार्क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्क निर्माण के लिए करीब 15 लाख रुपए का टेंडर भी किया गया है।

 

 

राजनीतिक दबाव का भी लगाया आरोप

देवेन्द्र स्वामी ने आरोप लगाया कि जमीन पर निर्माण का विरोध करने पर उन्हें राजनीतिक दबाव के चलते डराया-धमकाया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले भी भूमि की स्थिति को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया था।

प्रार्थीगण के अनुसार, टीम में सेटलमेंट विभाग, राजस्व विभाग और आवासन मंडल के अधिकारी शामिल थे।

 

 

ज्ञापन में जिला कलेक्टर से राजस्व रिकॉर्ड, न्यायालय के आदेशों और पूर्व में हुई भूमि की तरमीम की कार्रवाई की जांच कराने की मांग की गई है

 

 

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