24 दिन की दुर्गम यात्रा के बाद कैलाश मानसरोवर से लौटे चार कैलाशी, स्टेशन पर गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे
बीकानेर. सावन के पवित्र महीने में कैलाश मानसरोवर की दुर्गम और आध्यात्मिक यात्रा पूरी कर बीकानेर लौटे चार कैलाशियों का गुरुवार को रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया गया। करीब 24 दिन की यात्रा के बाद बाबूराम, उर्मिला, नवदीप और भवानी शंकर टाक जैसे ही बीकानेर पहुंचे, स्टेशन परिसर ढोल-नगाड़ों और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। परिवारजनों और शुभचिंतकों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया।
चारों कैलाशी 28 जुलाई को बीकानेर से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुए थे। सावन माह में भगवान शिव की तपोस्थली माने जाने वाले कैलाश पर्वत और पवित्र मानसरोवर के दर्शन करने के बाद गुरुवार को उनकी बीकानेर वापसी हुई।
परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू
लंबे इंतजार के बाद कैलाशियों को सकुशल अपने सामने देखकर परिवार के सदस्य भावुक हो गए। कई परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए। इस दौरान पूर्व कैलाशी योगेश और के.के. पारीक सहित अन्य लोगों ने भी चारों यात्रियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
कैलाशियों ने यात्रा के दौरान मिले आध्यात्मिक अनुभवों को परिवार और शुभचिंतकों के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान भगवान शिव से परिवार, समाज और देश की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की गई।
कठिन यात्रा के बाद घर वापसी की खुशी
कैलाश मानसरोवर यात्रा को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र यात्राओं में माना जाता है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बीच कैलाश पर्वत एवं मानसरोवर के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव माने जाते हैं।
परिजनों ने कहा कि सावन के महीने में चारों सदस्यों का कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर सकुशल बीकानेर लौटना परिवार के लिए गौरव और भावुकता का क्षण है। स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में परिजन और शुभचिंतक मौजूद रहे।

