बीकानेर निकाय चुनाव में RLP की एंट्री, टिकट कटे तो बगावत तय, इतने वार्डों में दावेदारी से बिगड़ेंगे BJP-कांग्रेस के समीकरण
बीकानेर. जिले में होने वाले निकाय चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के साथ अब अन्य राजनीतिक दल भी चुनावी मैदान में सक्रिय नजर आने लगे हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने बीकानेर नगर निगम सहित जिले की छह नगर पालिकाओं में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की इस सक्रियता से कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के चुनावी समीकरण बिगड़ सकते हैं।
आरएलपी की ओर से संभावित उम्मीदवारों की तलाश और वार्डवार राजनीतिक स्थिति का आकलन किया जा रहा है। इसके लिए सुबह से देर रात तक अलग-अलग स्थानों पर बैठकों का दौर जारी है। पार्टी के स्थानीय नेता वार्डों में जनाधार, जातीय समीकरण और संभावित प्रत्याशियों की पकड़ को समझने में जुटे हैं।
आरएलपी के स्थानीय नेताओं का दावा है कि बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में से 35 से अधिक वार्डों में चुनाव लड़ने के इच्छुक कार्यकर्ताओं के आवेदन मिल चुके हैं। इसके अलावा पार्टी श्रीडूंगरगढ़, लूणकरणसर सहित जिले की सभी छह नगर पालिकाओं के विभिन्न वार्डों में भी उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार श्रीडूंगरगढ़ और लूणकरणसर के साथ बीकानेर नगर निगम के कुछ वार्डों में आरएलपी की भाजपा और कांग्रेस से सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। हालांकि पार्टी कितने वार्डों में उम्मीदवार उतारेगी, इसकी अंतिम तस्वीर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
दूसरी ओर, भाजपा और कांग्रेस में टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार सामने आने से बगावत का खतरा भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। टिकट नहीं मिलने पर कई दावेदार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के वोटों का बंटवारा होने की आशंका है।
यदि आरएलपी मजबूती से उम्मीदवार उतारती है और भाजपा-कांग्रेस के बागी भी मैदान में डटे रहते हैं, तो कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। इससे भाजपा और कांग्रेस के लिए केवल प्रत्याशी जिताना ही नहीं, बल्कि नगर निगम और नगर पालिकाओं में अपना बोर्ड बनाना भी बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आरएलपी कितने वार्डों में मजबूत चेहरों को मैदान में उतारती है और भाजपा-कांग्रेस टिकट वितरण के बाद पैदा होने वाली नाराजगी को किस तरह संभालती हैं।

