28 दिन तक अन्न का त्याग, अनिता नाहटा ने पूर्ण किया मासखमण तप, जैन संस्कार विधि से हुआ पारणा
Bikaner News Dharm Karam

28 दिन तक अन्न का त्याग, अनिता नाहटा ने पूर्ण किया मासखमण तप, जैन संस्कार विधि से हुआ पारणा

Aug 23, 2026

 

बीकानेर. गंगाशहर की नई लाइन निवासी सुश्राविका अनिता नाहटा धर्मपत्नी राजेंद्र नाहटा ने लगातार 28 दिनों तक निराहार रहकर मासखमण तप पूर्ण किया। तपस्या की पूर्णाहुति पर जैन संस्कार विधि के अंतर्गत विधि-विधान एवं मांगलिक मंत्रोच्चार के साथ उनका पारणा करवाया गया।

 

 

 

जैन संस्कार विधि के संस्कारक धर्मेंद्र डाकलिया ने कहा कि लगातार 28 दिनों तक निराहार रहना दृढ़ मनोबल, रसना इंद्रिय पर विजय और अटूट इच्छाशक्ति का अनुपम उदाहरण है। वर्तमान समय में कुछ समय तक भूखा रहना भी कठिन लगता है, ऐसे में करीब एक महीने तक निराहार रहकर तपस्या करना अपने आप में बड़ी साधना है। जैन धर्म में तपस्या को आत्मशुद्धि और संचित कर्मों के क्षय का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।

 

 

 

धर्मेंद्र डाकलिया ने संपूर्ण विधि-विधान और मांगलिक मंत्रोच्चार के साथ तप संपूर्ति अनुष्ठान संपन्न करवाया। उन्होंने जैन संस्कार विधि को आचार्य तुलसी का महान अवदान बताते हुए कहा कि आडंबर से दूर और हिंसा के अल्पीकरण को ध्यान में रखकर आयोजित होने वाली यह विधि जन-जन के लिए प्रेरणादायी है।

 

 

सहयोगी संस्कारक देवेंद्र डागा और विपिन बोथरा ने मंगल भावना यंत्र के साथ तपस्विनी को पारणे के बाद ध्यान रखने योग्य बातों एवं संकल्पों की जानकारी दी। धार्मिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक गीतिकाओं के संगान से अनुष्ठान का वातावरण गरिमामय एवं उल्लासपूर्ण बना रहा।

 

 

रश्मि दसानी ने बताया कि अनिता नाहटा ने तपस्या के 28 दिनों के दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच बहुत कम मात्रा में केवल उबले हुए पानी का सेवन किया। रोशन और कीर्ति नाहटा ने बताया कि उन्होंने तपस्या के दौरान नियमित रूप से सामायिक, जप, स्वाध्याय, धर्म-ध्यान और प्रवचन श्रवण किया।

 

 

शीलम और भावना ने कहा कि देव, गुरु और धर्म के पुण्य प्रताप, गंगाशहर में विराजित साधु-साध्वियों की नियमित प्रेरणा तथा अनिता नाहटा के दृढ़ मनोबल से यह कठिन तप सानंद संपन्न हुआ।

 

 

संस्कारक धर्मेंद्र डाकलिया ने उपस्थित लोगों को जैन संस्कार विधि की विस्तृत जानकारी देते हुए तपस्या के उपलक्ष्य में अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार कोई छोटा या बड़ा त्याग करने का आह्वान किया। नाहटा परिवार की ओर से राजेंद्र पारस नाहटा ने जैन संस्कार विधि से तप संपूर्ति अनुष्ठान संपन्न करवाने पर धर्मेंद्र डाकलिया, देवेंद्र डागा और विपिन बोथरा का आभार जताया।