30 साल की सियासी मेहनत रंग लाई, अनिल कल्ला बने बीकानेर के महापौर, 50 वोट लेकर दर्ज की बड़ी जीत
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30 साल की सियासी मेहनत रंग लाई, अनिल कल्ला बने बीकानेर के महापौर, 50 वोट लेकर दर्ज की बड़ी जीत

Sep 21, 2026

बीकानेर. नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कल्ला ने बड़ी जीत हासिल की है। अनिल कल्ला को कुल 50 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 मतों से संतोष करना पड़ा। इसी के साथ नगर निगम की सबसे बड़ी कुर्सी पर कांग्रेस का कब्जा हो गया और अनिल कल्ला बीकानेर के नए महापौर निर्वाचित हुए।

 

 

नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने 42 वार्डों में जीत दर्ज की थी, लेकिन महापौर चुनाव में अनिल कल्ला को 50 वोट मिले। यानी कांग्रेस के तय आंकड़े से आठ वोट अधिक उनके पक्ष में आए। इससे साफ है कि कल्ला को कांग्रेस के पार्षदों के साथ ही निर्दलीय अथवा अन्य खेमे के पार्षदों का भी समर्थन मिला। वहीं भाजपा के 27 पार्षद निर्वाचित हुए थे, जबकि उसके प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले।

 

 

अनिल कल्ला की यह जीत केवल महापौर पद का चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके करीब तीन दशक लंबे राजनीतिक सफर का बड़ा मुकाम भी मानी जा रही है। राजनीति में कुछ चेहरे अचानक चर्चा में नहीं आते, बल्कि लंबे समय तक पर्दे के पीछे अपनी जमीन तैयार करते रहते हैं। अनिल कल्ला भी ऐसा ही नाम हैं।

 

 

शहर में आज सक्रिय कई युवा चेहरे जब राजनीति का अर्थ समझना शुरू कर रहे थे, उस दौर में अनिल कल्ला अपनी यूथ टीम के साथ वार्डों में सक्रिय थे। वार्ड स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिताएं हों या राजीव यूथ क्लब के कार्यक्रम, युवाओं के बीच उनकी मौजूदगी लगातार दिखाई देती रही। इस तरह राजनीति की पिच पर उनका अनुभव नया नहीं है।

 

एक दौर ऐसा भी आया, जब डॉ. बीडी कल्ला की चुनावी हार के बाद अनिल कल्ला कुछ समय के लिए सियासी तस्वीर से दूर हो गए। उनकी सार्वजनिक सक्रियता कम हुई, लेकिन पुराने साथियों और कार्यकर्ताओं से संपर्क बना रहा। लंबे अंतराल के बाद उन्होंने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में कदम बढ़ाया।

 

 

कोरोना काल में राजीव यूथ क्लब के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को राशन और आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना उनके सामाजिक-राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव साबित हुआ। कोरोना के बाद वह धीरे-धीरे पुराने राजनीतिक दायरे में लौटे और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता बढ़ने लगी।

 

 

नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने अनिल कल्ला को वार्ड नंबर 73 से प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस का चुनाव चिह्न मिलने के बाद उनके पुराने साथी फिर सक्रिय हुए और कार्यकर्ताओं में भी उत्साह दिखाई दिया। चुनाव परिणाम में अनिल कल्ला पार्षद निर्वाचित होकर नगर निगम पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें महापौर पद का प्रत्याशी बनाकर बड़ा राजनीतिक दांव खेला, जो सफल साबित हुआ।

 

 

हालांकि पार्षद चुनाव जीतने और महापौर प्रत्याशी बनाए जाने के बाद विरोधियों ने उन पर परिवारवाद के आरोप भी लगाए। अनिल कल्ला ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें राजनीति करते हुए करीब 30 वर्ष हो चुके हैं और वह चुनाव जीतकर आए हैं। ऐसे में परिवारवाद का आरोप लगाना विरोधियों की साजिश है।

 

 

महापौर चुनाव से पहले दोनों दल अपने-अपने पार्षदों की एकजुटता का दावा कर रहे थे और क्रॉस वोटिंग की आशंका भी जताई जा रही थी। परिणाम सामने आने के बाद अनिल कल्ला ने 50 वोट हासिल करके न केवल कांग्रेस का महापौर बनाया, बल्कि अपनी राजनीतिक पकड़ भी साबित कर दी। कभी यूथ टीम के साथ वार्डों में सक्रिय रहने वाला चेहरा अब बीकानेर नगर निगम की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंच गया है