700 साल पुरानी पांडुलिपियों से रूबरू हुए विद्यार्थी, भारतीय ज्ञान परंपरा का जाना महत्व
Bikaner News

700 साल पुरानी पांडुलिपियों से रूबरू हुए विद्यार्थी, भारतीय ज्ञान परंपरा का जाना महत्व

Jul 30, 2026

बीकानेर. भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर पांडुलिपियों के संरक्षण और संवर्धन का महत्व समझाने के उद्देश्य से राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, बीकानेर में श्री जैन पब्लिक स्कूल, गंगाशहर के 100 विद्यार्थियों एवं चार शिक्षकों ने शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने 700 वर्ष से अधिक प्राचीन दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया और उनके संरक्षण, सूचीकरण, प्रकाशन एवं डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया को करीब से जाना।

 

 

 

प्रतिष्ठान के अधिकारी डॉ. नितिन गोयल ने विद्यार्थियों को पांडुलिपियों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और ज्ञानपरक महत्व से अवगत कराते हुए बताया कि ये भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन के उद्देश्यों और गतिविधियों की भी जानकारी दी।

 

 

 

डॉ. गोयल ने कहा कि इतिहास के पुनर्निर्माण में पांडुलिपियां मूल स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें इतिहास, साहित्य, धर्म, दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा और सामाजिक जीवन से जुड़ा बहुमूल्य ज्ञान सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए इन ऐतिहासिक स्रोतों को प्रत्यक्ष रूप से देखना और संरक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझना उनके शैक्षणिक एवं व्यावहारिक ज्ञान को समृद्ध बनाता है।

 

 

 

उन्होंने बताया कि राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान अपनी आउटरीच गतिविधियों के तहत नियमित रूप से विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए आमंत्रित करता है, ताकि नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास के मूल स्रोतों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित हो सके।

 

 

 

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पांडुलिपियों के संरक्षण, सूचीकरण और डिजिटाइजेशन से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं को लेकर उत्सुकता दिखाई तथा विशेषज्ञों से कई प्रश्न पूछे। इस शैक्षणिक भ्रमण को सफल बनाने में श्री जैन पब्लिक स्कूल के शिक्षक सोफिन अहमद एवं अन्य शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।