एमजीएसयू में शुरू होंगे रोजगारोन्मुखी नए पाठ्यक्रम, घर बैठे ऑनलाइन कोर्स से सर्टिफिकेट ले सकेंगे विद्यार्थी
बीकानेर. महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में नए पाठ्यक्रमों और डिजिटल सुविधाओं की शुरुआत की जा रही है। विश्वविद्यालय के नव नियुक्त कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने शनिवार को प्रेसवार्ता में अपने तीन वर्षीय कार्यकाल की भावी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में एमएससी डाटा साइंस, फॉरेंसिक साइंस, मनोविज्ञान और सर्टिफिकेट इन ड्रोन टेक्नोलॉजी सहित चार नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।
कुलगुरु ने बताया कि रोजगारोन्मुखी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अंग्रेजी विभाग के माध्यम से विदेशी भाषा पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं। वहीं शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नए शोधार्थियों के पंजीयन के लिए विज्ञापन जारी किया जा रहा है। शोधार्थियों के पंजीयन से लेकर उपाधि प्रदान करने तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने की योजना है।
अनुभवी विशेषज्ञों से पढ़ेंगे विद्यार्थी
प्रो. बिश्नोई ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस योजना शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से अनुभवी प्रोफेशनल्स, चिकित्सकों, उद्योग विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को विद्यार्थियों की शिक्षा प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक एवं क्षेत्र विशेष का अनुभव उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालय में बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। पाठ्यक्रमों में इंटर्नशिप का प्रावधान किया गया है, जिससे विद्यार्थी पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार के अवसरों के लिए तैयार हो सकें।
घर बैठे ऑनलाइन कोर्स से मिल सकेगा सर्टिफिकेट
कुलगुरु ने विद्यार्थियों को स्वयं (SWAYAM) पोर्टल पर पंजीयन के लिए प्रेरित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी घर बैठे विभिन्न निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकेंगे। विश्वविद्यालय में डिजिटलाइजेशन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ऑनलाइन विद्यार्थी शिकायत निवारण केन्द्र स्थापित किया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय का अपना चैटबॉट तैयार करवाया जा रहा है, जो टेक्स्ट अथवा आवाज के माध्यम से विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देने में मदद करेगा।
संबद्ध कॉलेजों को भी ऑनलाइन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है, ताकि संबद्धता से जुड़े मामलों का समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन निस्तारण हो सके। विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज डिजिलॉकर पर अपलोड करवाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में उपलब्ध ई-रिसोर्सेज उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की जा रही है। इसके अलावा मानव संसाधन विकास मीडिया सेंटर की स्थापना कर शिक्षकों की क्षमता विकास के साथ विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों के रिकॉर्डेड वीडियो उपलब्ध करवाए जाएंगे।
कई नए पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता की तैयारी
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में एमबीए, एमसीए, बीसीए, बीबीए, एमएड, एमपीएड, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीएससी डाटा साइंस, बीएससी क्लिनिकल साइकोलॉजी, बीफार्मा और बीएससी नर्सिंग सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए संबंधित नियामक संस्थाओं से पंजीयन की कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आगामी समय में रिक्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों पर चयन एवं पदोन्नति की कार्यवाही की जाएगी। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ एमओयू कर विद्यार्थियों को अध्ययन, प्रशिक्षण और अन्य अवसर उपलब्ध कराने का भी प्रयास रहेगा।
दिसंबर में प्रस्तावित दीक्षांत समारोह
कुलसचिव यशपाल आहूजा ने बताया कि आगामी दीक्षांत समारोह राज्यपाल की सुविधानुसार दिसंबर 2026 में आयोजित करवाया जाना प्रस्तावित है। इसमें परीक्षा वर्ष 2025 के लगभग 1.27 लाख विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही 136 विद्या-वाचस्पति की उपाधियां भी प्रदान की जाएंगी।
मीडिया प्रभारी डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने के साथ जैव विविधता के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए भी आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। प्रेसवार्ता में संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. अनिल कुमार छंगाणी, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजाराम चोयल और निदेशक आईक्यूएसी डॉ. धर्मेश हरवानी उपस्थित रहे।

