भवन नहीं, भविष्य गढ़ने का संकल्प: 2030 तक 20 जिलों में परशुराम ज्ञानपीठ का लक्ष्य
बीकानेर. विप्र फाउंडेशन ने पिछले 18 वर्षों में सेवा, शिक्षा, संस्कार, उद्यमिता और सनातन चेतना के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान कायम की है। संगठन से जुड़े हजारों कार्यकर्ताओं और 45 जोन के माध्यम से संचालित गतिविधियों के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों तक सेवा और विकास की भावना पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यह बात विप्र फाउंडेशन युवा प्रकोष्ठ, राजस्थान जोन बी-1 के पूर्व संगठन महामंत्री दिनेश ओझा ने कही।
ओझा ने कहा कि विप्र फाउंडेशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि लाखों लोगों के विश्वास, संस्कार, आत्मीयता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा परिवार है। संगठन के करीब 20 सक्रिय प्रकल्प शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इनमें विप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, ISPAC, शंकर ई-लाइब्रेरी, बाबू मोशाय ई-मित्र और शिक्षा निधि सहित कई महत्वपूर्ण प्रकल्प शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि ISPAC के माध्यम से दस देशों में सनातन संस्कृति और भारतीय मूल्यों की चेतना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं अरुणाचल प्रदेश स्थित परशुराम कुंड से लेकर राजस्थान में विकसित हो रहे परशुराम ज्ञानपीठ तक संगठन की गतिविधियां व्यापक स्तर पर विस्तार ले रही हैं।
2030 तक 20 जिलों में परशुराम ज्ञानपीठ का लक्ष्य
दिनेश ओझा ने बताया कि विप्र फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक सुशील ओझा के मार्गदर्शन में वर्ष 2030 तक देश के 20 जिलों में परशुराम ज्ञानपीठ स्थापित करने का संकल्प लिया गया है। इसके अलावा कोलकाता में केशर कुंज, सूरत में विप्र गौरव भवन तथा रायपुर, उदयपुर, सागवाड़ा, परशुराम कुंड, सरदारशहर और बीकानेर सहित विभिन्न शहरों में शिक्षा एवं सामाजिक विकास के केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य चल रहा है।
उन्होंने कहा कि इन संस्थानों का उद्देश्य केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। इनका लक्ष्य आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान, संस्कार, शोध, कौशल और नेतृत्व के केंद्र विकसित करना है। युवाओं को शिक्षा के साथ संस्कार, कौशल के साथ अवसर और सामाजिक चेतना के साथ नेतृत्व का मंच उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
सामूहिक सहभागिता को बताया संगठन की ताकत
ओझा ने कहा कि विप्र फाउंडेशन की यात्रा किसी एक व्यक्ति या पद तक सीमित नहीं है। यह सामूहिक सहभागिता, विश्वास और संगठनात्मक आत्मीयता की यात्रा है। संगठन का प्रत्येक कार्यकर्ता इसकी शक्ति है और प्रत्येक शुभचिंतक इस परिवार का हिस्सा है। पद और दायित्व बदल सकते हैं, लेकिन अपनत्व, विश्वास और समर्पण संगठन की स्थायी पहचान हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस सामूहिक शक्ति को शिक्षा, सामाजिक सेवा, युवाओं के कौशल विकास, उद्यमिता और सनातन मूल्यों के संरक्षण की दिशा में और अधिक प्रभावी ढंग से लगाने की आवश्यकता है। आधुनिक ज्ञान के साथ नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ी रहे, इसके लिए ऐसे संस्थागत प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
दिनेश ओझा ने कहा कि विप्र फाउंडेशन की 18 वर्षों की यात्रा एक सशक्त समाज, संस्कारित पीढ़ी और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की साझा यात्रा है।

