लोकगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक : प्रो. अन्नाराम शर्मा
बीकानेर. राजस्थानी लोकगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक आत्मीयता और लोकजीवन की परंपराओं के सशक्त संवाहक हैं। लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाली सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को सहेजने का जरिया भी हैं। यह बात राजकीय डूंगर महाविद्यालय
होलाष्टक में सजेगी उस्ताद जमनादास कल्ला की ऐतिहासिक रम्मत, कीकाणी व्यास चौक में रातभर गूंजेंगे ख्याल और चौमासा गीत
बीकानेर। शहर में होलाष्टक के अवसर पर मंचित होने वाली पारंपरिक स्वांग मेहरी रम्मतों में कीकाणी व्यास चौक में आयोजित उस्ताद जमनादास कल्ला की रम्मत का विशेष स्थान है। इस बहुप्रतीक्षित रम्मत का मंचन शुक्रवार रात से शुरू होकर शनिवार सुबह तक चलेगा।

