दीपावली की रात को बच्चे और बुजुर्ग करते है आग से दिखाते है हैरतअंगेज करतब, 200 सालों से चली आ रही परंपरा

निखिल स्वामी
बीकानेर. बीकानेर अपनी परंपरा के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां दीपावली पर कई परंपरा होती है जिसका शहरवासी पूरी तरह से निर्वहन करते हैं. ऐसी ही एक परंपरा है जो सैकड़ों साल से चली आ रही है और इस परंपरा में अब युवा के साथ बच्चे, बुजुर्ग और युवतियां भी भाग लेती हैं. हम बात कर रहे है दीपावली पर बीकानेर के बारह गुवाड़ चौक में होने वाले बन्नाटी खेल की. यह खेल आग से खेला जाता है. यह दीपावली से एक दिन पहले छोटी दीपावली को खेला जाता है. यह खेल दशकों से कलात्मक प्रदर्शन और खिलाड़ियों के साहसिक दमखम से ख्याति बनाए हुए है. आग के इस खेल से दर्शक रोमांचित हो जाते हैं. इस आग के खेल से आपसी प्रेम और भाईचारे को भी बढ़ाते हैं. दीपावली की रात को होने वाले बन्नाटी खेल को देखने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में लोग जुटते है.
परंपरा से जुड़े ईशर दास छंगाणी ने बताया कि यह परंपरा 250 साल से चली आ रही है. सबसे पहले बन्नाटी की विधि विधान से पूजा की जाती है. यह एक साहसिक खेल है. जिसमें लोग आग के साथ अच्छा प्रदर्शन करते है. इसको लेकर लोग 15 दिन पहले से तैयारी शुरू कर देते है. सात बन्नाटियों के माध्यम से इस खेल का साहसिक प्रदर्शन होता है. बन्नाटी के दोनों और जलती हुई आग के गोले, इसको घुमाने के दौरान निकलने वाली सरसराहट की आवाज और हैरतअंगेज प्रदर्शन को देख हर कोई रोमांचित हो उठता है. इस दौरान सामूहिक रूप से गाए जाने वाले बोलो वाह बन्नाटी वाह गीत से पूरा प्रांगण गूंज उठता है.
बन्नाटी बनाने में मुख्य रूप से बांस की लकड़ियों, सूती वस्त्र, मूंगफली के तेल का उपयोग होता है. लोहे की चादर, छोटी कील, लोहे का पतला वायर, सफेद मिट्टी भी बन्नाटी तैयार करने के काम में ली जाती है. इसका वजन 8 से 10 किलो होता है. छह फुट की एक बांस की लकड़ी के दोनों सिरों पर करीब एक-एक फुट तक लोहे की चादर को कील की सहायता से गोलाई में लगाया जाता है. वे बताते है कि सूती धोती से कोड़े तैयार किए जाते हैं. इन कोड़ो को छह या आठ की संख्या में बांस की लकड़ी के दोनों ओर कील और वायर के माध्यम से बांध दिए जाता है. तैयार बन्नाटी को करीब 36 घंटे तक तेल में भिगोकर रखा जाता है. बाद में इसे तेल से निकालकर छोड़ दिया जाता है व दोनों ओर सफेद मिट्टी का लेप किया जाता है. बन्नाटी के दोनों ओर आग जलाकर प्रदर्शन किया जाता है.

