योगेश्वर कृष्ण के उपदेश वर्तमान युग में अधिक प्रासंगिक आचार्य-रवि शंकर

बीकानेर. रानीबाजार इंडस्ट्रियल एरिया के होटल पाणिग्रहण में चल रही श्री कृष्ण कथा श्री कृष्ण और अर्जुन संवाद बताया गया. जिसमें आचार्य रवि शंकर ने अपने प्रवचनों में कहा कि आधुनिक युग की विषमताओं को देखते हुए इसे प्रतिस्पर्धाओं का युग भी कहा जाता है। इस युग में श्री कृष्णा समान मार्गदर्शक एवं गुरु की शिक्षाएं अत्यंत प्रभावी है यदि आज का युवा वर्ग श्रीमद् भागवत गीता और कृष्ण के उपदेशों को अपने जीवन में उपयोग ले तो निश्चित रूप से अपने मानसिक द्वंद्व और प्रतिस्पर्धा को पार करके सफलता प्राप्त करेगा।
आचार्य हरिप्रसाद जी ने कहा कि जीवन में प्रत्येक पल अनमोल एवं कीमती है उसका सदुपयोग करना चाहिए। उत्पादकता अनिवार्य है,परंतु उत्पादकता में मात्र स्वयं का स्वार्थ ना होकर समाज हित भी होना चाहिए।
श्री कृष्णा हमें दुनिया को देखने की एक विशिष्ट दृष्टि प्रदान करते हैं। प्रतिस्पर्धा सदैव दूसरे से होती है जबकि अपने आप से की गई प्रतिस्पर्धा विकास की और ले जाती है इससे अलग प्रकार का चैतन्य हमारे अंदर उत्पन्न होता है।
श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं द्वंद से बाहर निकलो, राग, क्रोध एवं भय से बाहर निकलो। आचार्य कुलदीप ने अपनी मधुर वाणी से मंत्र मुग्ध करते हुए करते हुए भजन “कृष्ण कहानी सुनो रे कृष्ण कहानी” के माध्यम से श्रोताओं को श्री कृष्ण के जीवन की विभिन्न शिक्षाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कृष्ण समय की उपयोगिता को तथा समय पर किए जाने वाले कार्य के लिए प्रेरित किया।
जिसे टाइम मैनेजमेंट नहीं आता उसे लाइफ मैनेजमेंट भी नहीं आता।
श्री कृष्ण कहते हैं कर्म की कुशलता का नाम ही योग है।
सकारात्मक ही जीवन के उद्देश्य को निर्धारित करती है। जीवन की दिशा ठीक होने पर ही दशा ठीक हो पाती है।

