पुष्करणा सावा: रमक झमक संस्था ने सावा 2026 के लोगो का भव्य लोकार्पण किया

बीकानेर. पुष्करणा समाज की 450 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक परंपरा सावा विवाह एक बार फिर पूरे वैभव के साथ जीवंत होने जा रही है। इसी कड़ी में रमक झमक संस्था द्वारा पुष्करणा सावा 2026 के आधिकारिक लोगो का लोकार्पण किया गया। यह लोगो आगामी 10 फरवरी 2026 को होने वाले सावा विवाहों की पहचान बनेगा।
इस दिन पूरे शहर के लगभग हर घर में शहनाइयां गूंजेंगी। सैकड़ों शादियां एक ही शुभ मुहूर्त में संपन्न होंगी, जहां हर दूल्हा भगवान चंद्रशेखर और हर दुल्हन भगवती उमा का स्वरूप मानी जाएगी। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी है।
यह लोगो सभी विवाह निमंत्रण पत्रों और कुमकुम लग्न पत्रिकाओं पर अनिवार्य रूप से अंकित किया जाएगा, जिन पर भगवान चंद्रशेखर और माता उमा के नाम भी दर्ज होंगे। इससे परंपरा की एकरूपता और पवित्रता बनी रहेगी।
रमक झमक संस्था बीते वर्षों से इस लुप्तप्राय होती परंपरा को न केवल संरक्षित करने बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। संस्था द्वारा देश-विदेश में बसे प्रवासी पुष्करणा समाज को इस परंपरा के महत्व से अवगत कराया जाता है। यही कारण है कि इस बार भी बड़ी संख्या में प्रवासी बीकानेर पहुंचेंगे।
इस अवसर पर यह भी बताया गया कि छोटूजी ओझा द्वारा शुरू की गई सेवाओं और प्रयासों को रमक झमक आगे बढ़ा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली परंपरा से जुड़ी रहें।
रमक झमक का यह प्रयास न केवल परंपरा संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि संस्कृति को संजोकर ही उसे वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।

