तीन साल बाद होली पर फिर रहेगा भद्रा का साया, होलिका दहन गोधूली नहीं होगा

बीकानेर. तीन वर्षों के अंतराल के बाद एक बार फिर होली पर्व पर भद्रा का साया रहेगा। इस वर्ष होलिका दहन गोधूली बेला में नहीं, बल्कि मध्यरात्रि के बाद शास्त्र सम्मत मुहूर्त में किया जाएगा।
पंचांग के अनुसार 2 मार्च की रात 1 बजकर 26 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा।
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च की शाम 5 बजकर 56 मिनट से होगा, जो 3 मार्च की शाम 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि के दौरान भद्रा का प्रभाव रहने के कारण गोधूली बेला में दहन निषिद्ध रहेगा। भद्रा की समाप्ति के बाद पुच्छ काल में किया गया होलिका दहन ही शास्त्र सम्मत माना गया है।
इसी कारण इस वर्ष कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी मध्यरात्रि के बाद ही होलिका दहन किया जाएगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन करना अशुभ फलदायी माना जाता है, इसलिए शास्त्रों में भद्रा के उपरांत दहन का विधान बताया गया है।
इस वर्ष होली पर्व पर कई विशेष योग-संयोग भी बन रहे हैं। कुछ राज्यों में तिथि और स्थानीय परंपराओं के अनुसार होली 3 और 4 मार्च को मनाई जाएगी। वहीं, 3 मार्च को धुलंडी पर्व के दिन वर्ष का पहला चंद्रग्रहण भी दिखाई देगा, जिससे पर्व की धार्मिक महत्ता और बढ़ गई है।
चंद्रग्रहण की शुरुआत 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से होगी। यह ग्रहण भारत में दृश्य होगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, जबकि ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और जप का विशेष महत्व होता है।
इस प्रकार इस वर्ष होली पर्व केवल रंगों का उत्सव ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष और दुर्लभ संयोगों वाला रहेगा।

