“कृष्णगिरी वाली कैसा जादू किया…”: देवी भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर, गूंजे भक्ति के स्वर
Bikaner News

“कृष्णगिरी वाली कैसा जादू किया…”: देवी भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर, गूंजे भक्ति के स्वर

Mar 26, 2026

बीकानेर. छोटीकाशी बीकानेर इन दिनों भक्ति और आध्यात्म की अद्भुत ऊर्जा से सराबोर है। गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित चैत्र नवरात्रि के विराट देवी भागवत कथा महोत्सव में रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंचकर आध्यात्मिक आनंद और चमत्कारी अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। परमहंस परिव्राजकाचार्य, कृष्णगिरी पीठाधीश्वर वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज के पावन सान्निध्य में यह आयोजन भव्यता के साथ निरंतर जारी है।

 

 

 

कथा के दौरान जगद्गुरु श्रीजी ने कहा कि शक्तिमय तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ कृष्णगिरी कलयुग में भी चमत्कारों का केंद्र है, जहां देवी मां पद्मावती स्वयं विराजमान हैं। उन्होंने बताया कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से मां के चरणों में शीश नवाने वाला हर भक्त अपने जीवन के दुख और संकटों से मुक्ति पाकर सुख-समृद्धि प्राप्त करता है। उन्होंने मानव जीवन में सकारात्मकता, सेवा और निःस्वार्थ भाव से कार्य करने का संदेश भी दिया।

 

 

 

भजनों पर झूमे श्रद्धालु, गूंजे जयकारे

कथा के दौरान संगीतमय भजनों ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। “कृष्णगिरी वाली कैसा जादू किया…”, “आ मां आ तुझे दिल ने पुकारा”, “नाम अंबेरानी का दुखड़े मिटाने वाला है” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। पूरा पंडाल मां के जयकारों से गूंजता रहा और भक्त तालियों के साथ भक्ति में लीन नजर आए।

 

 

 

 

शक्ति उपासना का महत्व बताया

अष्टमी के विशेष प्रसंग में मां महागौरी की महिमा का वर्णन करते हुए जगद्गुरु श्रीजी ने कहा कि नवरात्रि शक्ति साधना का पर्व है। जीवन में संतुलन और सफलता के लिए शक्ति का संचय और संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि साधक शुद्ध और निःस्वार्थ है तो कोई भी देव शक्ति उससे ऊपर नहीं होती।

 

 

 

 

युवाओं को दिया विशेष संदेश

अपने प्रवचन में उन्होंने युवाओं को व्यसनमुक्त समाज के निर्माण में आगे आने का आह्वान किया। साथ ही “मेक इन इंडिया” और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग पर जोर देते हुए संस्कार, सदाचार और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

 

 

 

 

रामनवमी पर 1008 किलो पेड़े का भोग

आयोजन स्थल पर बनाए गए अस्थायी मंदिरों में रामनवमी के अवसर पर प्रभु श्रीराम को 1008 किलो से अधिक दूध के पेड़ों का भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद यह प्रसाद विशाल भंडारे के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।

 

 

 

चमत्कारी अनुभवों का दावा, उमड़ रही भीड़

कथा के दौरान श्रद्धालुओं को चमत्कारी अनुभव मिलने की बात कही जा रही है। पंडाल में इतनी भीड़ उमड़ रही है कि जगह कम पड़ रही है और कई लोग बाहर बैठकर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कथा का श्रवण कर रहे हैं।