पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बने दीपेश अग्रवाल, पांच वर्षों से पौधों की सेवा में समर्पित

बीकानेर। भीषण गर्मी, तेज लू और 45 डिग्री से अधिक तापमान के बीच जहां अधिकांश लोग घरों में रहने को मजबूर हो जाते हैं, वहीं राज्य कर विभाग में कार्यरत दीपेश अग्रवाल पिछले पांच वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और पौधों की सेवा में निरंतर जुटे हुए हैं। 9 मई को उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनका यह समर्पण समाज के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है।
दीपेश अग्रवाल ने अपने साथियों प्रशांत अग्रवाल और पवन चौधरी के सहयोग से बीकानेर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 115 से अधिक पौधे लगाए हैं। उनका उद्देश्य केवल पौधारोपण करना नहीं, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखकर वृक्ष बनने तक उनकी देखभाल करना है। इसी सोच के साथ वे पौधों की सेवा को सामाजिक जिम्मेदारी मानकर लगातार कार्य कर रहे हैं।
पिछले पांच वर्षों से वे शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए नियमित रूप से समय दे रहे हैं। जब बीकानेर का तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है और गर्म हवाओं के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, तब भी दीपेश अग्रवाल प्रतिदिन करीब दो घंटे पौधों को पानी देने में लगाते हैं। तपती धूप में पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचाना, सूखी मिट्टी को नम करना, टूटे पौधों को सहारा देना और उनके आसपास सफाई बनाए रखना उनके दैनिक कार्यों में शामिल है।
वे पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगवाने और तारबंदी करवाने का कार्य भी करते हैं, ताकि पशुओं और अन्य कारणों से पौधों को नुकसान न पहुंचे। उनका मानना है कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
दीपेश अग्रवाल का कहना है कि यदि आज पौधों और पर्यावरण को बचाया जाएगा, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, छांव और बेहतर वातावरण मिल सकेगा। वे लोगों को भी प्रेरित करते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी जरूर निभाए।
राज्य कर विभाग में अपनी सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय दीपेश अग्रवाल ने यह साबित किया है कि यदि सेवा भावना हो तो व्यस्त जीवन में भी समाज और प्रकृति के लिए समय निकाला जा सकता है। उनका कार्य आज बीकानेरवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
उनके जन्मदिवस पर शहरवासी उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर समाजसेवा की कामना कर रहे हैं। दीपेश अग्रवाल जैसे लोग वास्तव में समाज के ऐसे नायक हैं, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार के धरती को हरा-भरा बनाने में जुटे हुए हैं।

