एसकेआरएयू ने 40 वां स्थापना दिवस मनाया, राज्यपाल बोले : विश्वविधालयों का दायित्व केवल डिग्री देना नहीं, बौद्धिक विकास भी जरूरी
बीकानेर. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू) के 40वें स्थापना दिवस समारोह और डॉ. के.एन. नाग स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन शनिवार को हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल हरि भाऊ बागडे ने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बौद्धिक रूप से सशक्त बनाना भी है, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 40 वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और यहां से 28 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने पूर्व विद्यार्थियों का रिकॉर्ड संधारित करने तथा छात्रों को यूपीएससी और आरपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करने की बात कही। उन्होंने व्यवहारिक शिक्षा, नई शिक्षा नीति और ‘कॉपी मुक्त परीक्षा’ की अवधारणा पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन के तहत एसकेआरएयू में कृषि आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को मंजूरी मिल गई है, जिस पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह केंद्र किसानों, शोधार्थियों और कृषि क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोलेगा।
इस अवसर पर राज्यपाल ने केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को विश्वविद्यालय की सर्वोच्च शैक्षणिक मानद उपाधि ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ से सम्मानित किया। साथ ही विश्वविद्यालय की दो पुस्तकों का विमोचन भी किया।
डॉ. के.एन. नाग स्मृति व्याख्यानमाला में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने मरुस्थलीय वनस्पतियों—खेजड़ी, केर, कुमटिया, रसोड़ा और काचरी—पर वैज्ञानिक एवं औषधीय शोध बढ़ाने का आह्वान किया।
इससे पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में डीजीसीए से अधिकृत ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया, पौधारोपण किया तथा विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
समारोह में बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, कुलगुरु डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे, संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, जिला कलेक्टर निशांत जैन, पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षाविद, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में अतिथि उपस्थित रहे।

