पांच बार थमीं सांसें और धड़कन, पीबीएम के डॉक्टरों ने 1.2 किलो के नवजात को दी नई जिंदगी
बीकानेर. एसपी मेडिकल कॉलेज एवं पीबीएम अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) ने महज 29 सप्ताह में जन्मे 1.20 किलोग्राम वजनी प्रीमैच्योर शिशु को नया जीवन दिया है। उपचार के दौरान शिशु की सांस और हृदय की धड़कन पांच बार रुकने जैसी गंभीर स्थिति बनी। करीब 20 दिन वेंटिलेटर पर रहने और गंभीर संक्रमण से जूझने के बाद शिशु को 58वें दिन स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दी गई।
शिशु का जन्म 7 जुलाई 2026 को हुआ था। समय से काफी पहले जन्म लेने के कारण उसे सांस लेने में परेशानी थी और ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी। शुरुआती दिनों में पीलिया होने पर उसका उपचार किया गया। जन्म के बाद से ही मां का दूध देना शुरू कर दिया गया और सातवें दिन तक शिशु पूरी तरह मां का दूध लेने लगा।
पांच बार देना पड़ा सीपीआर
अस्पताल के अनुसार 28 जुलाई को शिशु की हालत अचानक गंभीर हो गई। उसकी सांस और हृदय की धड़कन रुकने जैसी स्थिति बनने पर डॉक्टरों ने तत्काल सीपीआर देकर उसे वेंटिलेटर पर रखा। उपचार के दौरान कम से कम पांच बार ऐसी स्थिति बनी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग टीम की तत्परता से हर बार शिशु की जान बचाई गई।
शिशु को पहली बार लगातार 14 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया। बाद में दोबारा सांस लेने में परेशानी होने पर फिर वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ी। आखिरकार 25 अगस्त को उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा दिया गया। कुछ समय ऑक्सीजन सहायता पर रखने के बाद शिशु सामान्य रूप से सांस लेने लगा।
दवाओं को बेअसर करने वाले संक्रमण से भी लड़ा
उपचार के दौरान शिशु गंभीर संक्रमण की चपेट में भी आ गया। जांच में एमडीआर क्लेबसिएला नामक बैक्टीरिया पाया गया, जिस पर कई सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। चिकित्सकों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दवाओं में बदलाव कर उपचार जारी रखा।
इस दौरान शिशु के फेफड़ों में रक्तस्राव, प्लेटलेट्स और शरीर में पोटैशियम की कमी जैसी गंभीर परेशानियां भी सामने आईं। आवश्यकता के अनुसार उसे रक्त और उसके विभिन्न घटक चढ़ाए गए। हालत में सुधार होने पर उसे कंगारू मदर केयर दी गई और धीरे-धीरे वह स्वयं दूध पीने लगा।
वजन और शारीरिक विकास में भी सुधार
शिशु को 2 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दी गई। उस समय वह बिना ऑक्सीजन सामान्य रूप से सांस लेने के साथ पूरा दूध स्वयं पी रहा था। जन्म के समय उसका वजन 1.20 किलोग्राम था, जो बढ़कर 1.55 किलोग्राम हो गया। उसकी लंबाई 41 से बढ़कर 44 सेंटीमीटर और सिर की परिधि 26 से बढ़कर 29 सेंटीमीटर हो गई।
शिशु की आंखों की जांच सामान्य पाई गई है। सुनने की क्षमता की विस्तृत जांच के लिए चिकित्सकों ने बीईआरए जांच की सलाह दी है। परिवार को नियमित जांच और फॉलोअप करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. पवन डारा के नेतृत्व में टीम ने किया उपचार
शिशु का उपचार प्रोफेसर डॉ. पवन डारा के नेतृत्व में किया गया। इसमें सीनियर रेजिडेंट डॉ. मोनिका और डॉ. सुभाष तर्ड सहित रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. शिवांश, डॉ. विशाल, डॉ. अमरनाथ, डॉ. जय जैन, डॉ. दीपिका बुडानिया, डॉ. विकास थोरी, डॉ. राजेश, डॉ. सोनू एवं डॉ. ललित पंड्या का सहयोग रहा। नर्सिंग ऑफिसर विकास, टीना, सुखजीत और पूरी NICU नर्सिंग टीम ने दिन-रात शिशु की निगरानी एवं देखभाल की।
शिशु का संपूर्ण उपचार मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत निःशुल्क किया गया। डॉक्टरों के अनुसार परिवार के धैर्य, सहयोग और चिकित्सा टीम पर विश्वास ने भी लंबे उपचार में अहम भूमिका निभाई।

