बीकानेर के युवा किसान रामलक्ष्मण को मिला मिलेनियर फार्मर का अवार्ड

बीकानेर. बीकानेर जिले की श्रीडूंगरगढ़ तहसील के धीरदेसर चोटियान गांव निवासी रामलक्ष्मण चोटिया को नई दिल्ली में 7 से 9 दिसंबर तक आईसीएआर ग्राउंड फूसा में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय कृषि कार्यक्रम में “मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया अवार्ड-2025” से सम्मानित किया गया.
अब किसान खेती में नए नए नवाचार कर रहे है. खासकर युवा तो खेती की दिशा भी बदल रहे है. जिससे किसानों को अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है. ऐसे ही किसान बीकानेर जिले की श्रीडूंगरगढ़ तहसील के धीरदेसर चोटियान गांव निवासी रामलक्ष्मण चोटिया है. कृषि में बीएससी कर रहे 20 साल के चोटिया ने पॉली हाउस बनाया और उसे बरसाती पानी से जोड़कर उत्पादन ढाई गुणा तक बढ़ाया है.
चोटिया के ऑर्गेनिक खेती, वर्षा जल तकनीक और ग्रीन हाउस इनोवेशन मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर बड़ी पहचान मिली है. राष्ट्रीय स्तर की जूरी ने उन्हें आधुनिक खेती, वर्षा जल संरक्षण तकनीक, ऑर्गेनिक मॉडल और ग्रीन हाउस इनोवेशन के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण इनोवेशन और योगदान के लिए चयन किया गया.
किसान चोटिया ने बताया कि उनके पास 20 बीघा खेत है. कुछ साल पहले तक श्रीडूंगरगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे जिले में पॉली हाउस के बारे में किसानों को ज्यादा जानकारी नहीं थी. क्योंकि यहां जमीन रेतीली है। पानी कम है या मीठा नहीं है. जबकि पॉली हाउस के लिए मीठा पानी चाहिए होता है. मैंने इस परेशानी का स्थाई समाधान निकालते हुए पॉली हाउस लगाने की पहल की. खेत में पुराना ट्यूबवैल है लेकिन पानी अनुकूल नहीं था. इसलिए खेत में 200 फीट लंबा, 50 फीट चौड़ा, 22 फीट गहरा फार्म पॉन्ड बनाया.
साथ ही डिग्गी बनाई. इन्हें बरसाती पानी से जोड़ा. फार्म पॉन्ड से जो मिट्टी निकली, उसे लगभग आधा बीघा में ऊंचाई में फैलाकर और समतल करके वहां पत्री बिछा दी ताकि बरसात की बूंदें गिरें तो पानी सीधे पौंड में आए. पॉली हाउस की छत का पानी भी इसी में आता है. जबकि घर की छत, पशु बाड़े की छत और अन्य स्थानों का बरसाती पानी डिग्गी में एकत्र होता है. इससे खीरा, मूंगफली सहित अन्य फसलों का उत्पादन दो से ढाई गुणा होने लगा है.
पहले कुल 400 क्विंटल मूंगफली होती थी, अब 1000 क्विंटल तक हो रही है. ट्यूबवैल का पानी काम में लें तो उसे घंटों तक चलाना पड़ता है, तब सिंचाई हो पाती है.
चोटिया ने बताया, हम गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, केंचुए से वर्मी वॉश बनाते हैं. नीम और करंज के पत्तों, छाछ आदि से दवा बनाते हैं यानी खेत पर ही जैविक खाद
जैविक दवाएं बनाकर पूरी तरह जैविक खेती करते हैं. इसमें सब्जियों के वेस्ट का भी उपयोग करते हैं. इससे खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार मजबूत हो रही है.

