जापानी बटेर के शोध में अब तक सामने आया चौंकाने वाला खुलासा, इस पौधे का पाउडर खाने से ग्रोथ होती है अच्छी

बीकानेर. बीकानेर के शुष्क इलाके में भी अब किसान और पशुपालक जापानी बटेर की फार्मिंग कर सकते है. इसके लिए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर में हुए शोध में अब तक सामने आया है कि जापानी बटेर भी इन इलाके के अनुकूल है. मजे की बात है कि जापानी बटेर को इस इलाके के पौधे का पाउडर खिलाने से ग्रोथ भी काफी अच्छी होती है. इन दिनों स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के समन्वित कृषि प्रणाली में पोल्ट्री यूनिट में जापानी बटेर पर अनुसंधान किया जा रहा है. हालांकि यह शोध अब पूरा होने वाला है.
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शंकर ने बताया कि जापानी बटेर को पशुपालक बड़ी संख्या में पालते है. हालांकि राजस्थान में इन जापानी बटेर का पालन नहीं करते थे. जापानी बटेर की डिमांड भी बहुत ज्यादा है. एमएससी के छात्रों के लिए ट्रायल लगवाया है. रेगिस्तान की गर्मी में जापानी बटेर को रखकर शोध किया जा रहा है. साथ ही इन जापानी बटेर को खाने के लिए सहजन की फली का पाउडर बनाकर इनको खाने के साथ दिया जाता है. सहजन खाने से इनकी क्वालिटी के अंदर काफी सुधार हुआ है. हालांकि अभी शोध पूरा नहीं हुआ है. काफी हद तक शोध हो गया है और उसमें पता लगा है कि सहजन का पाउडर खाने से इनका वजन भी बढ़ा है और कुछ दिनों के बाद यह जापानी बटेर भी अंडा देना शुरू कर देंगे.
इस शोध के लिए 180 जापानी बटेर लिए थे. जब यह जापानी बटेर चार दिनों के थे तब उन्हें यहां लेकर आए थे. इसके बाद 15 से 20 दिन हो गए है और इन जापानी बटेर को कुल 48 दिनों तक रखा जाएगा.
यहां अलग अलग लकड़ी के बॉक्स में इनको रखा गया है. इनको 15-15 के ग्रुप में रखा है. जिससे सही तरह से डाटा और रिकॉर्डिंग मिल सके. इसके अलावा छोटे बच्चों को गर्मी देने के लिए लट्टू यानि बल्ब लगाया गया है.
वे बताते है कि जापानी बटेर रखने के कई फायदे है. इनमें यह है कि यह पक्षी छोटा है, इसलिए यह जगह भी कम लेता है. बटेर में रोग लगने की संभावना बहुत कम होती है. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है. इस बटेर का मांस भी लोग खाते है. इसमें फैट और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम होता है. जिसके कारण लोगों को यह इसका मांस खाने से ओवर फैटी की समस्या नहीं आती है. ऐसे में अब किसानों और पशुपालकों के लिए भविष्य में रोजगार निकलकर आएगा.
वे बताते है कि सहजन एक बहु न्यूट्रिव पौधा है. यह पशुओं और इंसानों के लिए काफी फायदेमंद है. इसमें आयरन, प्रोटीन अच्छा होता है. इसी कारण यह सहजन इस पक्षी को खिलाकर शोध कर रहे है. ऐसे में अब बटेर को सहजन खिलाकर खाने की लागत को कम करने की कोशिश की जा रही है. जिससे किसान या पशुपालक का खर्चा कम हो और उससे उन्हें काफी अच्छा मुनाफा हो सके.

