शुष्क इलाके में भी पशुओं के अब मिलेगा हरा चारा, सिर्फ पानी में उगती है यह घास, खाने के कई फायदे

बीकानेर. अब किसानों को कम खर्च, कम जगह और कम समय में पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध हो सकेगा. सुनने में भले ही अजीब लगेगा, लेकिन यह सच है कि पश्चिमी राजस्थान जैसे शुष्क इलाके में भी अब पशुओं को पूरे साल भर तक हरा चारा मिल सकेगा. इसके लिए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय की समन्वित कृषि प्रणाली इकाई में एजोला घास की यूनिट संचालित की जा रही है. एजोला घास पशुओं के स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है. इन दिनों इसका डेमो भी किसानों को दिखाया जा रहा है और पशुओं पर प्रायोगिक तौर पर सफल प्रयोग हो रहे हैं. इससे पशु पालकों को काफी लाभ मिलेगा.
मजे की बात है कि यह ज्यादा गर्मी और ज्यादा सर्दी होने पर इस घास की उत्पादन कम होता है. इस घास को उगाने के लिए सीधी सूरज की धूप नहीं लगाते है इसके लिए किसी भी तरह के कपड़े से धूप से सुरक्षा कर सकते है. हालांकि इसको ग्रीन पर्दे से हल्की धूप या रोशनी मिलती रहती है. शहर हो या गांव किसान या पशुपालक इसके छोटी जगह में भी उगा सकता है. घरों की छतों और छोटी जगह पर इस एजोला घास को उगा सकते है. जिससे वे पूरे साल तक अपने पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था कर सकते है.
एजोला एक जलीय फर्न है, जो प्रोटीन, खनिज लवण, अमीनो एसिड, विटामिन ए, विटामिन बी 12 और बीटा-कैरोटीन से भरपूर है. यह धान की खेती में जैव-उर्वरक के रूप में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है और उपज बढ़ाता है. पशुओं के लिए यह आदर्श जैविक पूरक आहार है, जो सेहत सुधारने के साथ उनकी उत्पादन क्षमता भी बढ़ाता है. विश्वविद्यालय में 100 रुपए प्रति किलो की दर से किसानों को एजोला बीज उपलब्ध करा रहा है. कोई भी किसान समन्वित कृषि प्रणाली इकाई से बीज लेकर इसे आसानी से उगा सकता है.
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शंकर ने बताया कि यह ऐसी घास है जिसको न तो बहुत ज्यादा पानी और न ही मिट्टी की जरूरत होती है. इसके लिए छोटी जगह में भी एजोला घास का पालन किया जा सकता है. इस इलाके में हरे चारे की कमी ज्यादा रहती है. यहां हरा चारा साल में कुछ ही पशुओं के लिए उपलब्ध रहता है. पूरे साल पशुओं के लिए हरे चारे के लिए एजोला घास पर काम कर सकते है. एजोला घास में प्रोटीन की मात्रा बहुत अच्छी होती है. इस घास से पशुओं के प्रोटीन की जरूरत पूरी होती है और पशुओं के चारे का खर्चा भी कम होता है. इससे पशुओं के दूध उत्पादन भी बढ़ता है.
डॉ शंकर ने एजोला घास उगाने का तरीका बताया. जिसमें 1.5 से 2 फीट गहरे गड्ढे में पानी भरकर उस पर प्लास्टिक शीट डाल दी जाती है. फिर सड़ी हुई खाद की एक लेयर बना देंगे. इसके बाद खेत की मिट्टी की परत बनाकर पानी भरकर छोड़ देते है. इसके बाद एजोला के बीज डाले जाते है तो 7-10 दिन में एजोला उग जाती है और पूरे गड्ढे को भर देता है. फिर रोजाना एक से डेढ़ किलो एजोला घास निकालकर पशुओं को खिला सकते है. चार वर्ग मीटर का गड्ढा रोजाना करीब 2 किलो एजोला देता है. यह नम और गर्म जलवायु में यह तेजी से फैलता है और सालभर उपलब्ध रहता है.

