महाराजा गंगा सिंह जी ने इस गुरुद्वारे को उपहार में दिया था चांदी का ताला और सोने की चाबी

बीकानेर. बीकानेर की रियासत के समय की चीजें आज भी कई लोग संभाले हुए है. ऐसी ही एक अनोखी चीज है सोने की चाबी और चांदी का ताला. बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी ने रानीबाजार गुरुद्वारे को जमीन देने के बाद उपहार में चांदी का ताला और सोने की चाबी दी थी। यह ताला और चाबी आज भी गुरुद्वारे कमेटी ने संभाले हुए है. 13 मार्च 1937 को इस गुरुद्वारे का पट्टा भी जारी किया गया.
मजे की बात है कि इस चांदी के ताले का वजन करीब एक किलो की है वहीं सोने की चाबी करीब 200 ग्राम की थी. इसके अलावा चांदी का छत्र भी एक किलो से अधिक का है. यह ताला भी अनोखा है. जब ताले में चाबी डालते है तो ताला बीच में खुलता है और दो भाग में बांट जाता है.
उपप्रधान सुखविंदर सिंह ने बताया कि रानीबाजार का गुरु सिंध सभा गुरुद्वारा बीकानेर का सबसे पुराना है. महाराजा गंगा सिंह जी ने गुरुद्वारे के लिए जमीन भी दी थी. महाराजा गंगा सिंह जी के समय का पट्टा और एक पत्र भी है. उस समय चांदी का ताला, सोने की चाबी, छत्र भी भेंट यानी उपहार के रूप में दिया था. इस दौरान सिख समुदाय ने महाराजा गंगा सिंह जी का आभार भी व्यक्त किया था.
वे बताते है कि महाराजा गंगा सिंह जी हर समाज के बारे में अच्छा सोचते थे. उन्होंने गंगनहर लेकर आए तो उस समय सिख समुदाय से मिले और उन्होंने ही सिख समुदाय के लोगों को यहां बसाया. जिससे इस इलाके में खेतीबाड़ी अच्छी होगी.
महाराजा गंगा सिंह जी ने एक पत्र भी दिया था. जिसमें बीकानेर के अलावा सहवा और नोहर जैसे इलाकों में सिख समुदाय को बसाने में भी इसका उल्लेख किया गया है. इसके साथ ही बीकानेर राज्य की समृद्धि और शांति के लिए अरदास का भी जिक्र किया गया है.

