शिक्षकों के हकों की बुलंद आवाज: प्रदेश स्तरीय बैठक में 11 सूत्रीय मांगों पर मंथन
बीकानेर. राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील की प्रदेश स्तरीय संयुक्त बैठक जयपुर स्थित स्वामी कुमारानंद भवन में प्रदेश अध्यक्ष बन्नाराम चौधरी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों व शिक्षकों ने भाग लेकर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर गंभीर मंथन किया।
बैठक में शिक्षकों के वर्षों से लंबित स्थानांतरण, पदोन्नति और रिक्त पदों को भरने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रदेश मुख्य महामंत्री किशनलाल सारण ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति नहीं होने के कारण शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
प्रदेश महामंत्री यतीश वर्मा ने सत्र 2026 के शिविरा पंचांग में ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने मांग की कि विद्यालय पूर्व की भांति 1 जुलाई से ही खोले जाएं। साथ ही 1 अप्रैल से नए शैक्षिक सत्र लागू करने के निर्णय का स्वागत भी किया गया।
बीकानेर जिलाध्यक्ष आनंद पारीक ने शिक्षकों के अवकाश में की गई कटौती को अनुचित बताते हुए इसे वापस लेने की मांग रखी। उन्होंने तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लंबित स्थानांतरण और नव नियुक्त शिक्षकों के स्थायीकरण में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई।
कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष जसवंत सिंह नरूका ने जर्जर विद्यालय भवनों के सुरक्षा प्रमाण-पत्र शिक्षकों से लेने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए इसे तकनीकी विभाग से करवाने की मांग की। वहीं, वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की बात भी उठाई गई।
बैठक में स्टाफिंग पैटर्न लागू कर रिक्त पदों के सृजन, विभिन्न पदों की लंबित डीपीसी शीघ्र पूरी करने तथा विद्यालयों के भौतिक विकास पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई। कोषाध्यक्ष विष्णु कुमार तेली ने आठवें वेतनमान में देरी पर चिंता जताते हुए इस मुद्दे को न्यायालय में उठाने का निर्णय बताया।
प्रदेशाध्यक्ष बन्नाराम चौधरी ने कहा कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संगठन जल्द ही प्रभावी रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा।
बैठक में प्रदेशभर के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर शिक्षकों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

