बीकानेर में किसान-मजदूरों का ‘जेल भरो’ आंदोलन, पुलिस की गाड़ी के आगे बैठे प्रदर्शनकारी
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बीकानेर में किसान-मजदूरों का ‘जेल भरो’ आंदोलन, पुलिस की गाड़ी के आगे बैठे प्रदर्शनकारी

Aug 10, 2026

 

बीकानेर. भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमवार को बीकानेर में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन (AIAWU) और सीटू (CITU) के नेतृत्व में किसान-मजदूरों ने ‘जेल भरो’ आंदोलन किया। बड़ी संख्या में किसान और मजदूर प्रदर्शन में शामिल हुए और केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

 

 

 

प्रदर्शन के दौरान उस समय स्थिति रोचक हो गई, जब किसान-मजदूर पुलिस की गाड़ी के आगे सड़क पर बैठ गए और गिरफ्तारी देने पर अड़ गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे गाड़ी के आगे से हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस को गाड़ी पीछे लेकर प्रदर्शनकारियों के बीच से निकालनी पड़ी।

 

 

 

इसके बाद भी किसान-मजदूरों ने अपना आंदोलन जारी रखा और दूसरी पुलिस गाड़ी के सामने पहुंचकर गिरफ्तारी देने लगे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी में बैठकर ‘जेल भरो’ आंदोलन के तहत गिरफ्तारियां दीं। इस दौरान मौके पर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा।

 

 

 

 

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद किसान, मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं एवं प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा। जनसभा को सीपीआईएम के श्रीडूंगरगढ़ के पूर्व विधायक गिरधारी लाल महिया, जिला सचिव सुंदरलाल बेनीवाल, सीपीआई जिला सचिव अविनाश व्यास और कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।

 

 

 

वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को किसान-मजदूर विरोधी बताते हुए मांगों के समाधान के लिए आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।

 

 

 

MSP की कानूनी गारंटी समेत कई मांगें

प्रदर्शनकारियों ने सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। इसके साथ ग्रामीण ऋणग्रस्तता समाप्त करने के लिए व्यापक कर्जमाफी, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपए मुआवजा और पुनर्वास की मांग भी उठाई गई।

 

 

 

किसान-मजदूर संगठनों ने श्रम संहिताओं को रद्द करने, श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपए प्रतिमाह वैधानिक न्यूनतम वेतन तय करने, बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने तथा बीज विधेयक और FCI साइलो के निजीकरण को रोकने की मांग की।

 

 

 

मनरेगा में सालाना 200 दिनों के रोजगार की गारंटी और 700 रुपए प्रतिदिन मजदूरी, सेना, पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया तथा भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते और कृषि उपज के मुक्त आयात पर रोक की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

 

 

 

बीकानेर की स्थानीय समस्याएं भी उठाईं

आंदोलनकारियों ने बीकानेर संभाग और राजस्थान से जुड़ी स्थानीय समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाई। इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) में सिंचाई पानी की समस्या को लेकर नहर विभाग की रिजर्वायर भरने की नीति समाप्त करने और फसलों को बचाने के लिए सिंचाई पानी का रेगुलेशन जारी करने की मांग की गई।

 

 

 

श्रीडूंगरगढ़ में ट्रॉमा सेंटर सह उप-जिला अस्पताल का निर्माण जल्द शुरू करने और बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में डॉक्टर, नर्सिंग एवं सहायक स्टाफ के रिक्त पदों पर भर्ती की मांग भी की गई।

 

 

 

कृषि कुओं को कम से कम आठ घंटे बिजली देने, ट्रिपिंग और अघोषित कटौती बंद करने तथा डिमांड भर चुके किसानों को तत्काल कृषि कनेक्शन देने की मांग उठाई गई। इसके अलावा नशीले पदार्थों के बढ़ते कारोबार पर रोक, श्रमिकों के लिए आठ घंटे का कार्य दिवस और साप्ताहिक अवकाश, खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण रोक और कड़ा ट्री एक्ट बनाने तथा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई एवं नाली व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग भी रखी गई।

 

 

 

बड़ी संख्या में किसान-मजदूर रहे मौजूद

प्रदर्शन में अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष लालचंद भादू, जिला सचिव अशोक शर्मा, एड़वा की राज्य महासचिव डॉ. सीमा जैन, सीपीआईएम लूणकरणसर तहसील सचिव राम प्रताप, किसान सभा से लक्ष्मीनारायण वर्मा, सीताराम पूनिया, बजरंग छीपा सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों एवं किसान संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

 

 

 

वक्ताओं ने कहा कि किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।