साध्वी ऋतंभरा बीकानेर पहुंची, बोलीं — वर्षों बाद बीकानेर आई हूँ, आध्यात्मिक आनंद मिला, समाज को संगठित रहने का संदेश दिया

बीकानेर. दीदी मां साध्वी ऋतंभरा शनिवार सुबह बीकानेर पहुंचीं, जहां नाल एयरपोर्ट पर श्रद्धालुओं और आयोजकों ने उनका भव्य स्वागत किया। आगमन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीकानेर आकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने याद किया कि वर्षों पहले राम जन्मभूमि आंदोलन के समय भी वे यहां आई थीं, जब मंच पर रामसुखदास जी महाराज विराजमान थे और विशाल समाज एकत्रित हुआ था।
उन्होंने कहा कि इस बार वे भगवान के गुणगान और श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से भक्तों को आध्यात्मिक संदेश देने आई हैं। उनके अनुसार बीकानेर केवल एक शहर नहीं बल्कि धर्म और संत परंपरा से जुड़ी ऐसी नगरी है जहां आस्था लोगों के हृदय में बसती है। उन्होंने कहा, “यहां के लोग स्वर्ग जाने की नहीं, बल्कि स्वर्ग को धरती पर उतारने की भावना रखते हैं।”
साध्वी ऋतंभरा ने शहर के विकास की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में बीकानेर में बड़ा परिवर्तन और विकास दिखाई देता है, लेकिन आधुनिकता के साथ यहां की प्राचीन संस्कृति, हवेलियों की नक्काशी और विरासत आज भी विश्वभर के लोगों को आकर्षित करती है। उन्होंने इसे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि यहां का शिल्प इतना अद्भुत है मानो पत्थर भी अपनी कहानी स्वयं कहने लगते हों।
समसामयिक विषयों पर बोलते हुए उन्होंने समाज को संगठित रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के लिए दुर्जनों की दुष्टता से अधिक सज्जनों की निष्क्रियता खतरनाक होती है, इसलिए सज्जन शक्ति को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें अपनी भूमिका निभाती हैं, लेकिन समाज को भी अपनी शक्ति और जिम्मेदारी को पहचानना होगा।
धार्मिक आस्थाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यदि मंदिरों, प्रतिमाओं या धार्मिक प्रतीकों पर आक्रमण होते हैं तो भी सनातन आस्था को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि भारत विश्व में हिंदुओं का प्रमुख राष्ट्र है और अपनी भूमि, संस्कृति, परंपरा व भविष्य की रक्षा के लिए समाज को सजग और संगठित रहना आवश्यक है।

