मां सीता की विदाई प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर
Bikaner News Dharm Karam

मां सीता की विदाई प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भाव-विभोर

May 8, 2026

 

बीकानेर। केसरिया हनुमान मंदिर के 82वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य रामकथा महोत्सव में गुरुवार को मां सीता की विदाई का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथा के दौरान प्रस्तुत भावपूर्ण वर्णन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और कथा स्थल भक्तिरस में डूब गया।

 

 

 

कथा वाचन के दौरान जैसे ही यह पद गूंजा— “आज मेरी किशोरी अवध जाती सुकुमारी, सभी सखियां लिपट-लिपट सिसकती जाती…” — पूरा पंडाल करुण रस से भर उठा। उपस्थित श्रद्धालु इस प्रसंग को सुन भावुक हो उठे और कई महिलाओं की आंखें नम हो गईं।

 

 

 

रामकथा में आगे राजा दशरथ के महल में प्रभु श्रीराम और माता सीता के नगर आगमन का भव्य वर्णन किया गया। अयोध्या नगरी में दोनों के स्वागत, दीप सज्जा, मंगल गीतों और उत्सवमय वातावरण का चित्रण सुनकर श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंज उठे।

 

 

 

हालांकि कथा का माहौल उस समय गंभीर हो गया जब माता कैकई द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगने और भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने का प्रसंग आया। यह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु स्तब्ध रह गए और वनगमन का वर्णन होते ही वातावरण भावुक हो उठा।

 

 

इसके बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास यात्रा प्रसंग में केवट संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया गया। केवट की भक्ति, समर्पण और प्रभु श्रीराम के साथ उनके मधुर संवाद ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

 

 

रामकथा का वाचन कर रहे मंदिर के पुजारी पंडित केशव शुक्ल स्वयं भी कथा सुनाते-सुनाते भावुक हो गए। उनकी भावपूर्ण वाणी ने कथा को और अधिक जीवंत बना दिया।

 

 

 

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अंजनी कुमार शुक्ल ने बताया कि 82वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित यह रामकथा प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन रही है। बड़ी संख्या में भक्त कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं और प्रभु श्रीराम की लीलाओं का रसास्वादन कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में रामकथा के अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का भी मंचन एवं वाचन किया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है।