नायिका अपने प्रियतम को विदेश जाने से रोकने के लिए बीकानेरी शैली में हर माह की खासियत बताती

बीकानेर. भारतीय चित्रकला में मौसम, फसल एवं ऋतुओं के बदलते पेड़-पौधों को चित्रित करने की पुरानी परम्परा रही है. बारहमासा के चित्र भी उसी परम्परा का हिस्सा है. यह बारहमासा के चित्र बीकानेरी शैली में बने हुए है. इस शैली में नायक नायिका के मार्मिक, प्रिय संकलन दिखाया गया है. इस संकलन भी बीकानेर के राजकीय गंगा संग्रहालय में बारहमासा चित्रावली आज भी मौजूद है. जिसको देखने के लिए यहां देशी और विदेशी सैलानी काफी आते है.
बीकानेर. भारतीय चित्रकला में मौसम, फसल एवं ऋतुओं के बदलते पेड़-पौधों को चित्रित करने की पुरानी परम्परा रही है. बारहमासा के चित्र भी उसी परम्परा का हिस्सा है. यह बारहमासा के चित्र बीकानेरी शैली में बने हुए है. इस शैली में नायक नायिका के मार्मिक, प्रिय संकलन दिखाया गया है. इस संकलन भी बीकानेर के राजकीय गंगा संग्रहालय में बारहमासा चित्रावली आज भी मौजूद है. जिसको देखने के लिए यहां देशी और विदेशी सैलानी काफी आते है.
राजकीय गंगा संग्रहालय के प्रशासनिक अधिकारी शंकरदत्त हर्ष ने बताया कि बीकानेर संग्रहालय में काफी लघु चित्र प्रदर्शित है. जिसमें राग रागिनी भी है तो बीकानेर शैली भी प्रदर्शित की गई है. यहां सबसे ज्यादा बीकानेर शैली में हिंदी माह में बारह माह होते है. यहां बारह महीनों की वंशावली प्रदर्शित है. यह 18वी शताब्दी के लिखे हुए प्रदर्शित किए गए है.
इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें नायक और नायिका का चित्रण किया हुआ है. इसमें नायिका अपने प्रियतम या पति है उसको हर माह की विशेषता बताती है. इस माह में आप मुझे छोड़कर बाहर जा रहे है तो आपके बिना किस तरह पाऊंगी. ऐसे में नायिका इस माह में किस तरह रहती है तो आप मुझे छोड़कर कही न जाओ.
बीकानेरी शैली में कवियों में प्रत्येक महीने की विशेषताओं का वर्णन करते हुए लोक जीवन को चित्रित किया है तो कहीं नायक-नायिका की विरह वेदना के सहारे प्रकृति चित्रण को प्रदर्शित किया है. हिन्दी साहित्य में रीति कालीन कवि केशवदास का बारहमासा सर्वश्रेष्ठ माना जाता है जिस पर आधारित राजस्थानी व पहाड़ी शैली में चित्रावलियों चुना. बाद में कई लोक कवियों ने भी बारहमासा का वर्णन लिखा.
वे बताते है कि चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन की विशेषता दिखाई गई है.

