यह है राजस्थान का पहला स्टेडियम जहां लगी थी लिफ्ट, रानियां देखने आती थी मैच, अब 50 बरसों पड़ी है बंद
बीकानेर का इतिहास अपने भीतर कई स्वर्णिम यादें समेटे हुए है. यहां ऐसी कई धरोहरें मौजूद हैं जो कभी रियासतकालीन शान का प्रतीक रही हैं और आज भी गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं। ऐसी ही एक खास विरासत है बीकानेर के डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में लगी ऐतिहासिक लिफ्ट. यह कोई साधारण लिफ्ट नहीं, बल्कि एक समय में बीकानेर रियासत की आधुनिक सोच और तकनीकी प्रगति का उदाहरण मानी जाती थी
बताया जाता है कि यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के किसी भी स्टेडियम में लगी पहली लिफ्ट थी, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी. हालांकि अब यह लिफ्ट पिछले करीब 50 वर्षों से ताले में बंद है और उपयोग में नहीं ली जा रही. खेल विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि यह स्टेडियम अपने समय में देशभर में अपनी तरह का पहला स्टेडियम था, जहां इतनी आधुनिक सुविधा मौजूद थी
खेल विभाग के प्रभारी श्रवण भांभू ने बताया कि महाराजा गंगासिंह ने 1937 में गोल्डन जुबली पर स्टेडियम का निर्माण करवाया था, उसी समय यहां लिफ्ट लगवाई गई थी. तीन मंजिला भवन भी रियासतकाल का भवन निर्माण कला का अनोखा नमूना है. इस बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में बनी दर्शक दीर्घा में जाने के लिए लिफ्ट का उपयोग किया जाता था. इस लिफ्ट को शुरू करवाने को लेकर कई बार मीटिंगों में मुद्दा उठाया है, लेकिन अब तक चालू नहीं हुई है. जानकारों ने बताया कि इस लिफ्ट में पुरानी मशीन लगी हुई है. जिससे अब पूरी तरह खराब हो गया है और ताले में बंद है
इस स्टेडियम में राजा-महाराजा के अलावा रानियां भी मैच देखने के लिए आती थी. यहां लिफ्ट से पहले बने गैरेज में उनकी गाड़ी रुकती थी और वे सीधा गैरेज से लिफ्ट के माध्यम ऊपर हॉल में चली जाती थी. हॉल में ही बैठकर मैच का लुत्फ उठातीं थीं. जानकारों की माने तो लिफ्ट लगाने के पीछे यह उद्देश्य था कि इस स्टेडियम में जब भी मैच का आयोजन हो, तक राजा-महाराजा और रानियों के अलावा बाहर से गेस्ट आराम से मैच का लुफ्त उठा सके. सुरक्षा के लिहाज से भी ये लोग हॉल में लिफ्ट के माध्यम से पहुंचते थे और वहां बैठकर फुटबॉल का आनंद लेते थे

