खिलाड़ियों की फैक्ट्री है राजस्थान का यह गांव, जीत चुके हैं हजारों मेडल, दिलचस्प है इतिहास
महाराणा प्रताप अवॉर्डी व अंतरराष्ट्रीय साइक्लिस्ट दयालाराम सारण ने बताया कि गांव के एक खिलाड़ी हीराराम जी गाट ने साइक्लिंग का दौर शुरू किया था. उनके बाद साइक्लिंग का माहौल बढ़ा रहे है. ऐसे में गांव में खिलाड़ियों का क्रेज बढ़ता जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जेठाराम गाट ने बताया कि मैंने स्पोर्ट्स कोटे से भारतीय रेलवे में नौकरी लगा हुआ हुं. भारत के हर कोने में इस गांव का खिलाड़ी जॉब करता हुआ मिल जाएगा. इस गांव के ज्यादातर बच्चों के पास नेशनल मेडल है. रोजाना सुबह और शाम को यह खिलाड़ी तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करते है
गांव के बुजुर्ग मदनलाल ने बताया कि यह गांव 500 से 600 साल पुराना है. इस गांव के ज्यादातर लोग खेतीबाड़ी, गाड़ी चलाना और मजदूरी का काम करते हैं. इसके अलावा पशुपालन का काम करते हैं. इस गांव में पहले किसी जगह से दो तीन भाई आए थे और एक भाई को संतान नहीं थी. उनका नाम करमाराम था. फिर दूसरे भाई अपने भाई के नाम से करमीसर गांव का नाम रखा था. उन्होंने बताया कि इस गांव से अब तक सात खिलाड़ियों को महाराणा प्रताप पुरस्कार मिल चुका है. 10 से ज्यादा इंटरनेशनल और 50 से ज्यादा नेशनल लेवल के साइक्लिस्ट हैं. स्पोर्ट्स कोटे से 15 साइक्लिस्ट रेलवे, 4 राजस्थान पुलिस, 5 इंडियन आर्मी में कार्यरत हैं. राजस्थान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने वाले पहले साइक्लिस्ट गणेश सुथार इसी गांव के हैं, जिन्होंने एशियन गेम्स 1982 में भारत का प्रतिनिधित्व किया था

