अतिदिव्य चमत्कारी महामांगलिक कार्यक्रम आज, सकल संघ को आमंत्रण

बीकानेर। कृष्णगिरी शक्ति पीठाधीपति पूज्यपाद जगद्गुरु आचार्य 1008 वसंत विजयानंद गिरीजी महाराज की पावन निश्रा में 15 मार्च, रविवार को सर्व मंगलकारी, परम चमत्कारी सर्वबीज मंत्रयुक्त दिव्य महामांगलिक का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है।
श्री कृष्णगिरि, तमिलनाडु के श्री पार्श्वनाथ पद्मावती सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी गुरुभक्त डॉ. संकेश जैन ने बताया कि यह अतिदिव्य एवं चमत्कारी महामांगलिक कार्यक्रम गोगागेट सर्किल से स्टेशन रोड पर स्थित माइको कंपनी के पास, एसबीआई बैंक के सामने श्री पार्श्वचंद्र सूरी गच्छ जैन दादाबाड़ी (बगीची) आदिनाथ भवन में आयोजित होगा। कार्यक्रम रात्रि 8 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें सकल संघ को सपरिवार आमंत्रित किया गया है।
आशीर्वाद के लिए सेवा भक्ति जरूरी : जगद्गुरु
इससे पूर्व शनिवार को गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित कार्यक्रम में परमहंस परिव्राजकाचार्य, अनंत श्री विभूषित कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु 1008 परम पूज्यपाद श्री वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में हर वस्तु पार्सल या कुरियर से कहीं भी भेजी जा सकती है, लेकिन आशीर्वाद कभी पार्सल से प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए सेवा और भक्ति का मार्ग अपनाना आवश्यक है।
जगद्गुरु के पावन सानिध्य में शनिवार को विशेष महायज्ञ का आयोजन भी किया गया, जिसमें काशी से आए विद्वान विप्र पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं।
अपने प्रेरणादायी संदेश में शक्ति पीठाधीश्वर ने कहा कि व्यक्ति को कोई भी कार्य अपनी क्षमता से अधिक या कम नहीं करना चाहिए। उन्होंने आशावादी बनकर धर्म का सहारा लेने की प्रेरणा देते हुए कहा कि वर्तमान समय में धर्म का पुण्य बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। साधना करनी है तो धर्म की करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सेवा का फल अवश्य मिलता है, चाहे वह माता-पिता की हो या गुरु भगवंतों की। यदि साधक शुद्ध और निःस्वार्थ भाव से साधना करता है तो संसार का कोई देवता उससे ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पात्र अच्छा हो तो पदार्थ भी अच्छा ही रहेगा। आत्मा को सर्वशक्तिमान बताते हुए उन्होंने मनुष्य को प्राणी मात्र के कल्याण के लिए कार्य करने और सदैव प्रसन्न रहने की सीख दी।

