गुरु भक्ति से मिलती है शक्ति और चमत्कारिक अनुभूति : जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि महाराज

बीकानेर. परमहंस परिव्राजकाचार्य अनन्त श्री विभूषित कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि महाराज ने कहा कि यदि व्यक्ति सच्चे मन से गुरु भक्ति करना सीख लेता है, तो उसे न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है, बल्कि गुरु के चमत्कारिक प्रभाव भी जीवन में अनुभव होने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि गुरु और शिष्य का संबंध निःस्वार्थ भाव पर आधारित होना चाहिए। जिस प्रकार एक मां बिना किसी स्वार्थ के अपने बच्चे का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार शिष्य को भी अपने गुरु की सेवा पूर्ण समर्पण और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। सच्ची भक्ति वही है, जिसमें गुरु के सुख-दुख को शिष्य अपना मान ले।
गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित चैत्र नवरात्रि विराट कथा यज्ञ महोत्सव के दौरान शनिवार को संतश्री ने सनातन परंपरा की साधना शक्ति का विशेष अनुभव कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक अनुभूतियों को महसूस किया। कई श्रद्धालुओं ने दावा किया कि उन्हें दिव्य सुगंध का अनुभव हुआ, कहीं स्वतः प्रसाद प्राप्त हुआ तो कुछ स्थानों पर बिना जलाए रखे गए दीपक स्वतः प्रज्वलित हो उठे।
इस अनूठे आयोजन में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरुजी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। परिसर “जयकारों” से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने विभिन्न आध्यात्मिक अनुभव साझा किए। आयोजन के दौरान रोग निवारण, आर्थिक उन्नति, ऋण मुक्ति और रुके हुए कार्यों के पूर्ण होने जैसी अनुभूतियों का भी उल्लेख किया गया।
ग्यारह दिवसीय इस महोत्सव में वैज्ञानिक एवं शास्त्रोक्त विधि से श्री महालक्ष्मी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें नियमित रूप से हवन कुटीर में आहुतियां दी जा रही हैं।
जगद्गुरु श्रीजी ने अपने प्रवचन में कहा कि यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ गुरु के समक्ष जाया जाए, तो जीवन के दुख स्वतः समाप्त होने लगते हैं। उन्होंने गुरु, माता-पिता, बुजुर्गों और संतजनों की सेवा को जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि इसका फल निश्चित रूप से प्राप्त होता है।
उन्होंने अंत में कहा कि व्यक्ति को स्वयं को ईश्वर का सेवक मानते हुए पूर्ण आस्था के साथ जीवन जीना चाहिए, तभी उसे सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति हो सकती है।

