सूरज की रोशनी के हिसाब से रंग बदलती हैं बीकानेर ये हवेलियां, खूबसूरती ऐसी कि हो जाएंगे कायल
बीकानेर को हजार हवेलियों का शहर कहा जाता है. यहां पुराने शहर में एक से बढ़कर एक हवेलियां है. इन हवेलियों की नक्काशी और चित्रकला को देखने के लिए देश विदेश से सैलानी आते हैं. सैलानी यहां खड़े होकर इन हवेलियों को अपने कैमरे में कैद करते है.वहीं शहर में कई पुरानी हवेलियां ऐसी हैं, जिनकी नियमित सारसंभाल की जाती है. कई हवेलियों को अपने पुराने स्वरूप में ही दोबारा तैयार किया गया है. वहीं कुछ हवेलियां ऐसी हैं जर्जर हो रही है. हालांकि, जर्जर होने बाद भी इनकी खूबसूरती बरकरार है.
पर्यटन से जुड़े गोपाल सिंह ने बताया कि बीकानेर में हवेलियां सैकडो साल पुरानी हैं. पुराने शहर में हवेलियां ही है.इन हवेलियों की खास बात यह है कि बीकानेर की हवेली लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई है. सूरज की रोशनी के हिसाब से ये हवेलियों की दीवारें भी अपने रंग में परिवर्तन करती रहती हैं. तेज धूप में चटक रंग और शाम की हल्की रोशनी में अलग गहरा खूबसूरत रंग की होती है.हवेलियों की दीवारों को बनाने में इस्तेमाल खास ईंटों और रंगों की वजह से ये संरचनाएं काफी आकर्षक नजर आती हैं. बीकानेर में रामपुरिया की हवेली, बच्छावातो की हवेली, कोठारी की हवेली, ढाढा की हवेली सहित कई हवेलियां है.
हवेलियों पर शानदार नक्काशी कर मोर, फुल पत्ती आदि के चित्र बनाए गए है.हवेलियों की संरचनाएं अगल-अलग खंडों में नजर आएंगी, जिनके अंदर बड़े झरोखे, छज्जे, जालियां, बरामदा आदि दिखाई देंगे। हवेलियों के दरवाजों पर बने छज्जे अमूमन खूबसूरत नक्काशियों द्वारा सजाए जाते थे. यहां शिल्पकला का बेहतरीन प्रयोग देख सकते हैं.हवेली, किलो व महलों में झरोखा एक खास स्थान रखता है. इन्हें बड़ी खिड़कियां कह सकते हैं जो खूबसूरत शिल्पकला और नक्काशी की गई.हवेलियों में छोटे झरोखों से लेकर बड़े झरोखों का निर्माण किया जाता था। इसके अलावा हवेलियों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए जालियों का भी निर्माण किया जाता था। ये जालियां पत्थरों पर की गई नक्काशी को कहते है.

