अशक्ति से दुख, भक्ति से मोक्ष का मार्ग खुलता है : पं. सुनील व्यास
Bikaner News Dharm Karam

अशक्ति से दुख, भक्ति से मोक्ष का मार्ग खुलता है : पं. सुनील व्यास

Jun 3, 2026

बीकानेर। दाऊजी रोड स्थित श्री आदि गणेश मंदिर में श्री आदि गणेश भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पं. सुनील व्यास ने शुक आगमन, भीष्म स्तुति, कपिल चरित्र, ध्रुव चरित्र एवं ऋषभदेव चरित्र जैसे दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।

 

 

कथा के दौरान पं. व्यास ने कहा कि मनुष्य के सुख और दुख का मूल कारण उसकी आसक्ति है। कपिल भगवान द्वारा माता देवहूति को दिए गए उपदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि संसार की वस्तुओं में आसक्ति दुख का कारण बनती है, जबकि यही आसक्ति यदि भगवान और भक्ति में परिवर्तित हो जाए तो मोक्ष का द्वार खोल देती है।

 

 

उन्होंने कहा कि शुकदेव जी के आगमन से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ होता है, जिससे ज्ञान और भक्ति की पावन धारा प्रवाहित होती है। भीष्म स्तुति प्रसंग में पितामह भीष्म के जीवन को धर्म, नीति और अटूट भक्ति का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु शैया पर भी श्रीकृष्ण का स्मरण कर भीष्म ने संसार को यह संदेश दिया कि सच्चा भक्त हर परिस्थिति में ईश्वर को नहीं भूलता।

 

 

ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए पं. व्यास ने पांच वर्षीय बालक ध्रुव की अटल श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और भगवान के प्रति समर्पण को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि सच्ची लगन और अडिग विश्वास के बल पर असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। ध्रुव की भक्ति आज भी हर युग के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

 

 

कथा में ऋषभदेव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को ऋषभदेव जैसा आदर्श पिता बनने का प्रयास करना चाहिए। ऋषभदेव ने अपने पुत्रों को मानव जीवन का उद्देश्य बताते हुए दिव्य तप और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि भगवान को समर्पित भाव से किया गया प्रत्येक कर्म ही सच्चा तप है, जो अंततः अनंत सुख की प्राप्ति कराता है।

 

 

महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए पं. व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से धर्म और अधर्म के बीच का स्पष्ट अंतर बताया है तथा जीवन में क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसके आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य को भगवान पर पूर्ण भरोसा और अटूट विश्वास हो तो जीवन का कोई भी संकट उसे विचलित नहीं कर सकता।

 

 

कथा के दौरान “जय श्री राधे-जय श्री श्याम” के जयघोषों से पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया। कथा के यजमान देव सोनी एवं सोहन सोनी ने सपत्नीक विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न की। मंडल अध्यक्ष अविनाश चंद्र व्यास ने बताया कि कथा के तीसरे दिन जड़ भरत, राजा रहूगण संवाद, भौगोलिक एवं खगोलीय वर्णन, नरक प्रसंग, अजामिल चरित्र, वृत्रासुर की भक्ति तथा प्रह्लाद चरित्र का वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर रामजी व्यास ने भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।