मशहूर है बीकानेर का रसगुल्ला, 20 से अधिक देशों में इसकी डिमांड, करोड़ों का कारोबार
पश्चिम बंगाल की मिठाई रसगुल्ले को अब बीकानेर का रसगुल्ला टक्कर दे रहा है. जिस तरह बंगाल का रसगुल्ला प्रसिद्ध है तो वहीं बीकानेर का रसगुल्ला भी काफी प्रसिद्ध है. हालांकि पश्चिम बंगाल में इस मिठाई का जन्म हुआ है लेकिन अब रसगुल्ला
सिर्फ एक माह मिलती है यह मिठाई, लक्ष्मी जी को है अति प्रिय, आधे घंटे में हो जाता है तैयार, दीवाली में बढ़ जाती है डिमांड
दीवाली पर मिठाई की जबरदस्त डिमांड रहती है. खासकर बीकानेर की मिठाईयों की मांग अधिक रहती है. इस शहर में बनने वाली मिठाई की स्वाद ही अलग रहती है. यहां की मिठाई देश-विदेश में प्रसिद्ध है. बीकानेर में दीवाली पर मिठाई आमतौर पर
यह है दुनिया की सबसे छोटी कचौरी! एक बार में 10-12 पीस खा जाते हैं लोग, 30 दिन तक नहीं होती खराब
बीकानेर की गलियों में मिलनी वाली कचौरियां अपने स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इस शहर में कई स्पेशल खाने की चीजें मिलती है. आपने कई तरह की कचौरी खाई होगी, लेकिन आज हम आपको बीकानेर की नहीं बल्कि दुनिया की
इस मंदिर की अनोखी मान्यता, रोल नंबर लिखी पर्ची हनुमान जी के हाथ में रखने से हो जाते हैं पास
अगर ग्रेजुएशन में पास होना है तो पर्ची दे दो, पास हो जाओगे. यह वाक्य सुनने और पढ़ने में अजीब लगेगा, लेकिन यह सच है. यह कोई पेपर की सेटिंग नहीं बल्कि हनुमान जी का चमत्कार है. जी हां आप सही सुन रहे
एक मंदिर…25 शिवलिंग! इस अनोखे मंदिर के दर्शन से मिलता स्वर्ग, भक्तों की रहती भीड़
Bikaner Shiv Mandir: सावन में भगवान शिव की पूजा कर रहे है, ऐसे में बीकानेर के कई ऐसे शिव मंदिर है जो काफी प्राचीन और रहस्यमई है. इन मंदिरों में लोग सुबह से शाम तक भगवान का अभिषेक और पूजा कर रहे है. ऐसे
राजस्थान में इस जगह रिटायर्ड फौजी करते है मां के मंदिर की देखभाल, 30 साल पहले हुआ था निर्माण
बीकानेर. जिस तरह जैसलमेर में तनोट माता का मंदिर बना हुआ है और वहां जवान इस मंदिर की सार संभाल और आरती करते है ठीक वैसे ही बीकानेर के तिलक नगर में भी तनोट माता का मंदिर बना हुआ और यह मंदिर बीएसएफ और
परिवार हो तो ऐसा! तीन सगे भाई-बहन ने जीते बॉक्सिंग में 24 मेडल, अब हर तरफ हो रही चर्चा
बीकानेर अब खेलों की नगरी के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. यहां के एक परिवार के तीनों सगे भाई-बहन ने नेशनल लेवल पर मेडल हासिल किया है. यह बीकानेर का पहला परिवार है और संभवतः राजस्थान का भी. खास बात यह
खिलाड़ियों की फैक्ट्री है राजस्थान का यह गांव, जीत चुके हैं हजारों मेडल, दिलचस्प है इतिहास
राजस्थान के बीकानेर जिले में एक खास गांव है, जहां से हर साल नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ी तैयार होते हैं. इस वजह से इस गांव को खिलाड़ियों वाला गांव भी कहते हैं. हम बात कर रहे हैं बीकानेर से सटा करमीसर गांव की.
यह है राजस्थान का पहला स्टेडियम जहां लगी थी लिफ्ट, रानियां देखने आती थी मैच, अब 50 बरसों पड़ी है बंद
बीकानेर का इतिहास अपने भीतर कई स्वर्णिम यादें समेटे हुए है. यहां ऐसी कई धरोहरें मौजूद हैं जो कभी रियासतकालीन शान का प्रतीक रही हैं और आज भी गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं। ऐसी ही एक खास विरासत है बीकानेर के डॉ.
इस महाराजा से जुड़ा है भुजिया का नाम, 150 साल पुराना है स्वाद, कुछ ही बचे हैं कारीगर
आमतौर पर आपने कई आकार की भुजिया का स्वाद चखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी राजघराने की भुजिया का स्वाद चखा है? अगर नहीं तो हम बताते है बीकानेर राजघराने में करीब 150 साल पहले भुजिया शुरुआत हुई थी. वैसे तो मोटे और

